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भारत में जलवायु परिवर्तन का पशुओं पर असर: बढ़ती बीमारियाँ और गर्मी से तनाव

Health  •  👁 8 views  •  28 Jan 2026
भारत में जलवायु परिवर्तन का पशुओं पर असर: बढ़ती बीमारियाँ और गर्मी से तनाव
भारत में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के पशुपालन और कृषि क्षेत्र पर भी गंभीर असर डाल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती गर्मी और अनियमित मौसम के कारण गाय, भैंस और अन्य घरेलू पशुओं में बीमारियों की संख्या बढ़ रही है और वे हीट स्ट्रेस (गर्मी से तनाव) का सामना कर रहे हैं।
अधिक तापमान और लंबे सूखे के मौसम में पशुओं का भोजन और पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है। इससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता घटती है और वे पाचन, उत्पादन और प्रजनन में समस्याओं का सामना करते हैं। इसके अलावा, संक्रामक और पारजीवी बीमारियाँ जैसे बुखार, डायरिया और टिक्स जैसी समस्याओं में भी वृद्धि देखी जा रही है।
पशुपालक बता रहे हैं कि गर्मी और आर्द्रता के असामान्य स्तरों के कारण दूध उत्पादन कम हो रहा है और पशु अधिक थकावट और तनाव में दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि छायादार स्थल, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार की व्यवस्था करना आवश्यक है। इसके साथ ही वैक्सीनेशन और नियमित स्वास्थ्य जांच से बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय शोध संस्थानों का कहना है कि यदि जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए सस्टेनेबल पशुपालन तकनीक अपनाई जाए, तो पशुओं की उत्पादकता और स्वास्थ्य बनाए रखी जा सकती है। इसमें ठंडक देने वाले पद्धति, मौसम आधारित फीडिंग और जल प्रबंधन शामिल हैं।
कुल मिलाकर, भारत में पशुपालन क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी और बीमारियों के बढ़ते जोखिम से निपटने के लिए नवीन तकनीक, जागरूकता और सही प्रबंधन बेहद जरूरी है, ताकि पशुओं का स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुरक्षित बनी रहे।