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छिपी हुई मेडिकल हिस्ट्री से मुंबई की विधवा को 78 लाख का नुकसान, NCDRC ने ईमानदारी के सिद्धांत को बरकरार रखा

Crime  •  👁 10 views  •  28 Jan 2026
छिपी हुई मेडिकल हिस्ट्री से मुंबई की विधवा को 78 लाख का नुकसान, NCDRC ने ईमानदारी के सिद्धांत को बरकरार रखा
मुंबई: मुंबई की एक विधवा ने अपने पति की मृत्यु के बाद जीवन बीमा राशि का दावा किया, लेकिन छिपी हुई मेडिकल हिस्ट्री के कारण उन्हें 78 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। यह मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में पहुंचा, जहां आयोग ने बीमा में ‘पूरी ईमानदारी’ (Utmost Good Faith) के सिद्धांत को बरकरार रखा।
NCDRC के फैसले के अनुसार, बीमा पॉलिसी लेने के समय यदि किसी भी महत्वपूर्ण मेडिकल जानकारी को छुपाया जाता है, तो बीमा कंपनी को दावा अस्वीकार करने का अधिकार होता है। मामले में, बीमा कंपनी ने यह तर्क दिया कि मृतक पति ने अपनी कुछ पूर्व मेडिकल कंडीशन्स छुपाई थीं, जिससे जोखिम का सही आंकलन नहीं किया जा सका।
आयोग ने स्पष्ट किया कि इंश्योरेंस में ईमानदारी और पूरी जानकारी साझा करना अनिवार्य है। इस फैसले से यह संदेश गया कि बीमा कंपनियों और ग्राहकों के बीच विश्वास और पारदर्शिता का महत्व सर्वोपरि है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला बीमा धारकों के लिए एक चेतावनी है कि पॉलिसी आवेदन में हर जानकारी सही-सही भरनी चाहिए। वहीं, बीमा कंपनियों के लिए भी यह जरूरी है कि वे दावे की प्रक्रिया में निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच करें।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि बीमा उद्योग में कानूनी नियम और सिद्धांतों का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है। NCDRC का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि छिपी हुई जानकारी के कारण होने वाले नुकसान में बीमाधारक जिम्मेदार होगा।
इस तरह, मुंबई की इस विधवा के मामले ने बीमा उद्योग में ईमानदारी, पारदर्शिता और सावधानी की अहमियत को एक बार फिर उजागर किया।