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SC ने जातिगत भेदभाव पर UGC रेगुलेशन को चुनौती देने वाली PIL पर सुनवाई की मंजूरी दी

Education  •  👁 8 views  •  28 Jan 2026
SC ने जातिगत भेदभाव पर UGC रेगुलेशन को चुनौती देने वाली PIL पर सुनवाई की मंजूरी दी
नई दिल्ली: भारत की सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने हाल ही में UGC द्वारा जारी जातिगत भेदभाव रोकने के नए रेगुलेशन को चुनौती देने वाली पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर सुनवाई करने की सहमति जताई है। मामला इस बात को लेकर है कि UGC के नियमों में “कठोर” जातिगत भेदभाव की परिभाषा अस्पष्ट और विवादास्पद है।
PIL में दायर याचिकाकर्ता का कहना है कि नए नियमों की व्याख्या में अस्पष्टता होने के कारण, विश्वविद्यालय और कॉलेज सत्यापन प्रक्रिया में असमान निर्णय ले सकते हैं, और छात्रों तथा शिक्षकों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से यह भी कहा कि नियमों का उद्देश्य सही होने के बावजूद, इसकी अस्पष्ट परिभाषा लागू करने में दिक्कतें पैदा कर सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला उच्च शिक्षा में जातिगत समानता और न्याय सुनिश्चित करने से जुड़ा है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनवाई में अपने तर्क रखने के निर्देश दिए और इस PIL को प्राथमिकता से सुनने पर सहमति जताई।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुनवाई UGC के रेगुलेशन की वैधता और प्रभावशीलता पर अहम सवाल उठाएगी। अगर नियमों की परिभाषा को अदालत संशोधित करने या स्पष्ट करने का निर्देश देती है, तो यह देश के शैक्षिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
शिक्षाविद और नीति विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में सामाजिक न्याय और उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
इस सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि जातिगत भेदभाव रोकने वाले नियम कितने प्रभावी और न्यायसंगत हैं और इसे लागू करने में किन सुधारों की आवश्यकता है।