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UGC के नए एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियम: कैंपस में जातिगत भेदभाव को खत्म करने में कितने कारगर?

Education  •  👁 5 views  •  28 Jan 2026
UGC के नए एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियम: कैंपस में जातिगत भेदभाव को खत्म करने में कितने कारगर?
नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में कैंपस में जातिगत भेदभाव और भेदभावपूर्ण व्यवहार को रोकने के लिए नए एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों के बीच समान अवसर सुनिश्चित करना और उच्च शिक्षा संस्थानों में समावेशिता को बढ़ावा देना है।
नए नियमों के तहत किसी भी छात्र या कर्मचारी को उनकी जाति, धर्म, लिंग या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, संस्थानों को अनिवार्य रूप से डिस्क्रिमिनेशन शिकायत निवारण कमेटी गठित करनी होगी, जो शिकायतों की जांच करेगी और त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगी।
शिक्षाविदों का कहना है कि यह कदम सराहनीय है और इससे कैंपस में सुरक्षित और समान वातावरण बनाने में मदद मिलेगी। प्रो. अंजलि मेहता ने बताया, “कानून बनाना आसान है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता संस्थान की इच्छाशक्ति और जागरूकता पर निर्भर करेगी। शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी जरूरी है।”
दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नियम लागू होने के बावजूद सांस्कृतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों को तुरंत बदल पाना कठिन होगा। उनका मानना है कि भेदभाव रोकने के लिए नियमों के साथ निरंतर जागरूकता अभियान और छात्रों की भागीदारी भी जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, UGC का यह कदम उच्च शिक्षा में समानता और समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि संस्थान नियमों का पालन सही तरीके से करेंगे, तो यह कदम केवल कानूनी प्रावधान नहीं बल्कि एक सामाजिक बदलाव की शुरुआत बन सकता है।
यह निर्णय न केवल भारत के विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव को कम करने में मदद करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समान और सुरक्षित शिक्षा परिवेश सुनिश्चित करने में भी सहायक होगा।