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‘व्यक्ति बच्चा है’: कलकत्ता हाई कोर्ट ने नाबालिग द्वारा कार चलाने का केस रद्द किया

law  •  👁 9 views  •  28 Jan 2026
‘व्यक्ति बच्चा है’: कलकत्ता हाई कोर्ट ने नाबालिग द्वारा कार चलाने का केस रद्द किया
कोलकाता: कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में उस नाबालिग के खिलाफ दायर मामले को रद्द कर दिया, जिसने ‘जज’ बोर्ड और ‘ब्लू बीकन’ लगी कार चलाई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिग की उम्र को ध्यान में रखते हुए उसे आपराधिक जिम्मेदारी से अलग रखा गया है, क्योंकि भारतीय कानून में नाबालिगों के लिए अलग न्याय प्रक्रिया निर्धारित है।
मामला तब उजागर हुआ जब एक युवा ने विशेष पहचान वाले वाहन को चलाते हुए सड़क पर देखा गया। वाहन पर ‘जज’ बोर्ड और ‘ब्लू बीकन’ लगी हुई थी, जो आम जनता और कानून प्रवर्तन के बीच विशेष पहचान का संकेत देती है। यह घटना मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, और पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की।
हालांकि, जांच में यह सामने आया कि वाहन चलाने वाला व्यक्ति नाबालिग है। कोर्ट ने नोट किया कि भारतीय बाल न्याय अधिनियम के तहत नाबालिगों को आपराधिक मामलों में अलग न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना होता है, और सीधे केस दर्ज करना उचित नहीं था। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग की सुरक्षा और पुनर्वास प्राथमिकता है, बजाय कठोर दंड के।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला यह दर्शाता है कि कानून नाबालिगों को सुधारात्मक दृष्टिकोण से देखता है, न कि सजा आधारित। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि परिवार और स्थानीय प्रशासन नाबालिग को सही मार्गदर्शन दें और ऐसे वाहन चलाने की घटनाओं को रोका जाए।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि सड़क सुरक्षा और नाबालिगों की जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे रखा जाए। हाई कोर्ट का निर्णय कानून की संवेदनशीलता और समाज में नाबालिगों के पुनर्वास की आवश्यकता को स्पष्ट करता है।