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कंबोडिया के साइबर ठिकानों से भोजपुर के गांव तक: 20 हजार कॉल्स ने खोली अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी की परतें

Crime  •  👁 5 views  •  28 Jan 2026
कंबोडिया के साइबर ठिकानों से भोजपुर के गांव तक: 20 हजार कॉल्स ने खोली अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी की परतें
अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध की एक चौंकाने वाली कहानी कंबोडिया के हाई-टेक साइबर ठिकानों से शुरू होकर बिहार के भोजपुर जिले के एक छोटे से गांव तक पहुंचती है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, करीब 20,000 फोन कॉल्स ने उस नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने रख दी, जो देश-विदेश में हजारों लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था।
जांच में सामने आया है कि कंबोडिया में स्थित साइबर ठगी केंद्रों से भारत के अलग-अलग राज्यों में कॉल की जाती थीं। इन कॉल्स के जरिए खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस या सरकारी एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को डराया जाता था और उनसे पैसे ऐंठे जाते थे। कॉल डाटा और डिजिटल ट्रेल की गहन जांच के बाद एजेंसियों को इन ठगों की जड़ भोजपुर के एक गांव में मिली।
कॉल रिकॉर्ड्स के विश्लेषण से पता चला कि गांव के कई युवक कंबोडिया में इन साइबर ठिकानों पर काम कर रहे थे। वहीं से वे भारत में मौजूद सहयोगियों के संपर्क में रहते थे, जो बैंक खातों, सिम कार्ड और फर्जी दस्तावेजों की व्यवस्था करते थे। ठगी से मिले पैसे को कई खातों के जरिए घुमाकर नकद में निकाला जाता था।
20,000 से अधिक कॉल्स की जांच ने यह भी उजागर किया कि यह नेटवर्क बेहद संगठित था। कॉल स्क्रिप्ट, टारगेट लिस्ट और भुगतान की पूरी प्रणाली पहले से तय थी। गांव में अचानक बढ़ी आर्थिक गतिविधियां, पक्के मकान और महंगे वाहन भी जांच के दौरान एजेंसियों के शक के घेरे में आए।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि कैसे वैश्विक साइबर अपराध स्थानीय स्तर पर अपनी जड़ें जमाते हैं। सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण इलाकों के युवाओं को मोटे पैसों का लालच देकर अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का हिस्सा बनाया जा रहा है।
फिलहाल एजेंसियां कॉल डेटा, बैंक ट्रांजैक्शन और विदेश यात्रा रिकॉर्ड्स की मदद से पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी हैं। यह कहानी न सिर्फ एक साइबर अपराध का खुलासा है, बल्कि डिजिटल युग में बढ़ते खतरों की गंभीर चेतावनी भी है।