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‘मेरा दिल कहता है वह कहीं ज़िंदा है’: झारखंड में 7 वर्षों से लापता बेटी की तलाश में चंद्रमुणि की अनथक लड़ाई

Crime  •  👁 15 views  •  27 Jan 2026
‘मेरा दिल कहता है वह कहीं ज़िंदा है’: झारखंड में 7 वर्षों से लापता बेटी की तलाश में चंद्रमुणि की अनथक लड़ाई
झारखंड के गुमला जिले की रहने वाली चंद्रमुणि उराइन ने 2018 में लापता हुई अपनी बेटी को खोजने के लिए सात साल से भी अधिक समय तक संघर्ष किया है। उनकी बेटी उस समय मात्र 15 वर्ष की थी जब वह एक स्थानीय धार्मिक शिक्षक (भक्ताइन) के घर जाने के बाद अचानक लौट कर नहीं आई। चंद्रमुणि अब भी मानती हैं कि “मेरे दिल का कहना है कि वह कहीं ज़िंदा है” और इसी उम्मीद के साथ वह बेटी को खोजने के लिए अदालत तक पहुंची हैं।
चंद्रमुणि का कहना है कि जब उनकी बेटी नियमित रूप से भक्ताइन के घर जाने लगी, उन्होंने इसे लेकर स्थानीय प्रशासन को कई बार आगाह किया, परंतु गंभीर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद एक दिन वह घर से निकली और वह वापस नहीं आई। चंद्रमुणि का आरोप है कि भक्ताइन के घर जाने के बहाने उनकी बेटी को कहीं ले जाया गया, लेकिन पुलिस को इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
उन्हें 2019 में FIR दर्ज कराने में देरी भी हुई, जब तक शिकायत दर्ज हुई तब तक काफी समय बीत चुका था। पुलिस स्टेशन में अंततः मामला दर्ज हुआ, जिसमें चंद्रमुणि ने बताया कि उनकी बेटी को धार्मिक काम के बहाने ले जाया गया और बाद में उसे बेच दिया गया — यह दावा उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा था।
किसी भी ठोस सुराग नहीं मिलने के कारण जांच काफी धीमी रही और इस बीच चंद्रमुणि ने झारखंड उच्च न्यायालय में हबीअस कॉर्पस याचिका दायर की, ताकि अदालत के निर्देश से पुलिस को जल्दी और प्रभावी रूप से कार्रवाई करने के लिए बाध्य किया जा सके। अदालत ने पुलिस को जांच की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है और साथ ही सरकार को श्रमिकों और प्रवासियों से जुड़ी नीति तैयार करने के लिए भी कहा है।
चंद्रमुणि की कहानी सिर्फ एक माँ की दर्दभरी खोज नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में बच्चों की सुरक्षा, पुलिस की धीमी जांच और सामाजिक ढाँचों द्वारा माताओं की लड़ाई का प्रतीक भी है। उनकी उम्मीद आज भी बनी हुई है कि उनके बेटी की वापसी संभव है, और इसी उम्मीद ने उन्हें सात वर्षों तक लड़ाई जारी रखने की शक्ति दी है।