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दिल्ली HC का बड़ा आदेश: आरोपी से खुद को दोषी साबित करने वाली जानकारी लेने के लिए ‘शॉर्टकट’ का उपयोग नहीं किया जा सकता

Crime  •  👁 10 views  •  27 Jan 2026
दिल्ली HC का बड़ा आदेश: आरोपी से खुद को दोषी साबित करने वाली जानकारी लेने के लिए ‘शॉर्टकट’ का उपयोग नहीं किया जा सकता
दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय में कहा है कि जांच एजेंसी सेक्शन 91 के तहत ऐसे आदेश नहीं जारी कर सकती जिसमें आरोपी को स्वयं‑आत्म अभियोजन (self‑incriminating) जानकारी देने के लिए मजबूर किया जाए। अदालत ने यह रुख सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश इश्रात मसरूर क़ुद्दूसी को दिए गए एक नोटिस के खिलाफ आए विवाद में अपनाया।
सेक्शन 91 CrPC का मुख्य उद्देश्य पहले से मौजूद दस्तावेज़ों या चीज़ों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है — यानी उस दस्तावेज़ को अदालत या जांच अधिकारी के सामने लाना जो पहले से अस्तित्व में है। यह प्रावधान आरोपी को किसी विवरण को याद करके नया दस्तावेज़ या जानकारी तैयार करने के लिए बाध्य नहीं करता। हाईकोर्ट ने कहा कि जब आरोपी से अपने मोबाइल नंबर, बैंक खातों का विवरण, ड्राइवरों/सेवकों की जानकारी जैसी चीज़ें पूछी जाती हैं — और यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी याददाश्त का उपयोग करके यह सब जानकारी “तैयार” करे — तो यह खुद‑पर आरोप लगाने वाली जानकारी प्राप्त करने जैसा होता है, जो संविधान के अनुच्छेद 20(3) के तहत निषिद्ध है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की जानकारी आरोपी से जबर्जस्ती लेना खुद को गवाह बनाने जैसा है और यह जांच एजेंसियों को मिलने वाली शक्तियों का गलत उपयोग है। इससे बचने के लिए जांच एजेंसियों के पास अन्य वैध तरीके मौजूद हैं — जैसे कि धारा 161 CrPC के तहत पूछताछ करना, जहाँ आरोपी मौन रहने का अधिकार रखता है, या बैंक और टेलीकॉम कंपनियों से सीधे रिकॉर्ड प्राप्त करना।
न्यायालय ने कहा है कि अगर किसी दस्तावेज़ या सूचना को प्राप्त करना ज़रूरी है, तो उसे ऐसे स्रोतों से हासिल किया जा सकता है जो स्वतंत्र हों, न कि आरोपी को आत्म‑दोष साबित करने वाली जानकारी देने के लिए मजबूर किया जाए। इससे आरोपी के मौलिक अधिकारों की रक्षा होती है और जांच का संतुलन भी सुरक्षित रहता है।
यह फैसला भारत में आत्म‑दोष के खिलाफ संवैधानिक सुरक्षा (Article 20(3)) को पुनः पुष्ट करता है और यह संकेत देता है कि जांच एजेंसियों को अनुचित दबाव या “शॉर्टकट” उपाय अपनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी यदि वे कानून या संविधान के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।