The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 डोपिंग से दूर रहें खिलाड़ी: अखिल कुमार, अर्जुन अवार्डी एवं डी.एस.पी. हरियाणा पुलिस     🔴 देवेश चंद्र श्रीवास्तव विशेष आयुक्त पुलिस /क्राइम के मार्गदर्शन एवं सुश्री वेदिता रेड्डी आईएएस निदेशक (शिक्षा) के नेतृत्व में एक लाख बच्चे नशा ना करने के शपथ अभियान में हुए शामिल     🔴 बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों में जागरूकता आवश्यक: प्रो. (डॉ.) जे.एस. यादव डीन     🔴 एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों का दमखम, कामेत हाउस रहा अव्वल     🔴 9 दिन बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं? 44°C में तपते नागरिक, जिम्मेदार कौन?     🔴 बस स्थानक के बाहर निजी बसों की भीड़: सड़क किनारे यात्रियों की भराई से यातायात व्यवस्था पर सवाल     🔴 हरियाणा खेल विश्वविद्यालय का मनाएगा तीसरा स्थापना दिवस     🔴 नगरपालिका अध्यक्ष एवं शिक्षा निदेशक के कुशल नेतृत्व में छात्र ~छात्राओं ने रचा इतिहास     🔴 जहाँ सपनों को मिलती है सही दिशा इनायतिया स्कूल बना रहा बच्चों का मजबूत भविष्य     🔴 खिरपुरी जैसी घटना अकोला में न हो: सामाजिक कार्यकर्ता सलीम सिद्दीकी ने जल आपूर्ति व्यवस्था पर उठाए सवाल    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

'महाकाल की उपस्थिति में कोई वीआईपी नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन मामले में मध्य प्रदेश HC की चुनौती को खारिज किया

National   •   👁 16 views   •   27 Jan 2026
'महाकाल की उपस्थिति में कोई वीआईपी नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन मामले में मध्य प्रदेश HC की चुनौती को खारिज किया
महाकाल की उपस्थिति में कोई वीआईपी नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन मामले में मध्य प्रदेश HC की चुनौती को खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में ‘वीआईपी दर्शन’ के मुद्दे पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की चुनौती पर विचार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि “महाकाल की उपस्थिति में कोई भी वीआईपी नहीं है”, जिससे मंदिर में सभी श्रद्धालुओं के लिए समान रूप से दर्शन का अधिकार सुनिश्चित होता है।
इस मामले की पृष्ठभूमि यह है कि कुछ श्रद्धालुओं ने मंदिर में विशेष वीआईपी पास के जरिए दर्शन की अनुमति देने को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वीआईपी दर्शन व्यवस्था अन्य भक्तों के अधिकारों के खिलाफ है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कुछ विशेष छूट को मान्यता दी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती देने योग्य नहीं माना।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जोर दिया कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के बीच भेदभाव नहीं होना चाहिए। मंदिर सभी के लिए खुला और समान होना चाहिए, चाहे कोई सामान्य नागरिक हो या कोई उच्च पदस्थ व्यक्ति। कोर्ट ने कहा कि भगवान के दर्शन में किसी को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता, और सभी श्रद्धालुओं का अनुभव समान होना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला धार्मिक स्थलों में समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक है। इससे यह संदेश गया कि धार्मिक आयोजनों में किसी प्रकार का भेदभाव या विशेषाधिकार स्वीकार्य नहीं है।
इस निर्णय के बाद उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में अब सभी भक्त समान रूप से दर्शन कर पाएंगे, और मंदिर प्रशासन को वीआईपी पास जैसी व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता होगी।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला धार्मिक स्थल समानता और जनता के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है।