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'किसी को भी महिला के शरीर का उल्लंघन करने का लाइसेंस नहीं': ओडिशा हाईकोर्ट ने रेप केस में सज़ा बरकरार रखी

Crime  •  👁 9 views  •  27 Jan 2026
'किसी को भी महिला के शरीर का उल्लंघन करने का लाइसेंस नहीं': ओडिशा हाईकोर्ट ने रेप केस में सज़ा बरकरार रखी
ओडिशा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें उसने रेप के आरोपी की सज़ा को बरकरार रखा। कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि “किसी को भी महिला के शरीर का उल्लंघन करने का लाइसेंस नहीं है”, और समाज में महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
यह मामला उस व्यक्ति से जुड़ा था, जिसे निचली अदालत द्वारा कड़ी सज़ा सुनाई गई थी। आरोपी ने हाईकोर्ट में सज़ा कम करने की याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने जांच रिपोर्ट, सबूत और पीड़िता की गवाही को ध्यान में रखते हुए सज़ा को न्यायसंगत और उचित माना।
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि रेप जैसे अपराध महिला सुरक्षा, सामाजिक न्याय और कानून की धज्जियाँ उड़ाने वाले होते हैं। ऐसे मामलों में कड़ी सज़ा का होना न केवल अपराधी को दंडित करता है, बल्कि समाज में नैतिक संदेश और डर पैदा करता है, जिससे महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला महिलाओं के अधिकार और उनकी सुरक्षा के प्रति न्यायपालिका की गंभीरता को दर्शाता है। यह न केवल आरोपी के लिए बल्कि समाज में मौजूद सभी लोगों के लिए सुस्पष्ट चेतावनी भी है कि अपराध के कोई बहाने स्वीकार्य नहीं होंगे।
ओडिशा हाईकोर्ट का यह निर्णय कानून और सामाजिक जागरूकता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह साबित करता है कि न्यायपालिका महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त और निर्णायक कदम उठाने में संकोच नहीं करती।
इस प्रकार, यह मामला महिला सुरक्षा, कानूनी कार्रवाई और न्यायपालिका की दृढ़ता का प्रतीक बन गया है।