The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 डोपिंग से दूर रहें खिलाड़ी: अखिल कुमार, अर्जुन अवार्डी एवं डी.एस.पी. हरियाणा पुलिस     🔴 देवेश चंद्र श्रीवास्तव विशेष आयुक्त पुलिस /क्राइम के मार्गदर्शन एवं सुश्री वेदिता रेड्डी आईएएस निदेशक (शिक्षा) के नेतृत्व में एक लाख बच्चे नशा ना करने के शपथ अभियान में हुए शामिल     🔴 बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों में जागरूकता आवश्यक: प्रो. (डॉ.) जे.एस. यादव डीन     🔴 एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों का दमखम, कामेत हाउस रहा अव्वल     🔴 9 दिन बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं? 44°C में तपते नागरिक, जिम्मेदार कौन?     🔴 बस स्थानक के बाहर निजी बसों की भीड़: सड़क किनारे यात्रियों की भराई से यातायात व्यवस्था पर सवाल     🔴 हरियाणा खेल विश्वविद्यालय का मनाएगा तीसरा स्थापना दिवस     🔴 नगरपालिका अध्यक्ष एवं शिक्षा निदेशक के कुशल नेतृत्व में छात्र ~छात्राओं ने रचा इतिहास     🔴 जहाँ सपनों को मिलती है सही दिशा इनायतिया स्कूल बना रहा बच्चों का मजबूत भविष्य     🔴 खिरपुरी जैसी घटना अकोला में न हो: सामाजिक कार्यकर्ता सलीम सिद्दीकी ने जल आपूर्ति व्यवस्था पर उठाए सवाल    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

“52 लाख से 9.16 करोड़: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने विकलांग वकील को मुआवज़े में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दी, कहा ‘यह सिर्फ़ संख्याओं की बात नहीं’”

law   •   👁 31 views   •   27 Jan 2026
“52 लाख से 9.16 करोड़: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने विकलांग वकील को मुआवज़े में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दी, कहा ‘यह सिर्फ़ संख्याओं की बात नहीं’”
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक विकलांग वकील को मुआवज़े में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देते हुए इसे 52 लाख रुपये से बढ़ाकर 9.16 करोड़ रुपये कर दिया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल संख्याओं की नहीं, बल्कि न्याय, समानता और मानव गरिमा से जुड़ा है।
मामले में वकील ने अपनी गंभीर विकलांगता के कारण पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में हुए नुकसान के लिए मुआवज़ा मांगने की याचिका दायर की थी। निचली अदालत ने प्रारंभ में 52 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे अपर्याप्त माना।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विकलांग वकील ने पेशेवर चुनौतियों का सामना करते हुए समाज और न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि मुआवज़े की राशि केवल वित्तीय नुकसान को नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक मूल्य को भी प्रतिबिंबित करनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत में विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों और न्यायिक संरक्षण के दृष्टिकोण में मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे यह संदेश जाता है कि न्यायालय केवल मौद्रिक मुआवज़ा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित की गरिमा और जीवन की गुणवत्ता को भी ध्यान में रखते हैं।
वकील ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह न केवल उनके लिए बल्कि अन्य विकलांग पेशेवरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हाई कोर्ट के इस फैसले ने साबित कर दिया कि न्याय प्रणाली में संवेदनशीलता और मानवता का महत्वपूर्ण स्थान है।
कुल मिलाकर, यह रिकॉर्ड मुआवज़ा सिर्फ़ रकम नहीं, बल्कि न्याय और समान अवसरों का प्रतीक बन गया है।