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राजकीय कला के रूप में व्यापार नीति: आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से वापसी

Business  •  👁 8 views  •  26 Jan 2026
राजकीय कला के रूप में व्यापार नीति: आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से वापसी
हाल ही में अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने बताया है कि व्यापार नीति अब केवल आर्थिक उपकरण नहीं रह गई है, बल्कि यह राजकीय कला का एक माध्यम बन चुकी है। यह बदलाव वैश्विक और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण आर्थिक और सांस्कृतिक रणनीति का हिस्सा बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापार नीति का उद्देश्य अब केवल मूल्य स्थिरीकरण, निर्यात-आयात संतुलन या विदेशी निवेश आकर्षित करना नहीं है। बल्कि यह अब राज्य की पहचान, सांस्कृतिक पहलू और राजनीतिक रणनीति का भी प्रतिनिधित्व करती है। नीति के माध्यम से देश अपने आर्थिक हितों और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को बढ़ावा देता है।
विशेष रूप से भारत जैसी अर्थव्यवस्था में, व्यापार नीति का प्रभाव औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी तक फैला हुआ है। इसके अलावा, नीति निर्माता अब इसे सांस्कृतिक और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार कर रहे हैं, जिससे यह राज्य की ‘आर्ट ऑफ़ गवर्नेंस’ का हिस्सा बन गई है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जब व्यापार नीति को राजकीय कला के रूप में देखा जाता है, तो निर्णय लेने में दीर्घकालिक रणनीति, सामाजिक प्रभाव और नैतिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखा जाता है। इससे न केवल आर्थिक लाभ मिलता है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा भी मजबूत होती है।
इस दृष्टिकोण से, व्यापार नीति अब केवल नियम और कानून का संग्रह नहीं रह गई है। यह राज्य की सामरिक सोच, सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक उद्देश्यों का संयोजन बन गई है।