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‘यह गरीबी की कहानी है’: दिल्ली में हज़ारों छात्र शाम के स्कूलों में जाने को मजबूर

Education  •  👁 9 views  •  26 Jan 2026
‘यह गरीबी की कहानी है’: दिल्ली में हज़ारों छात्र शाम के स्कूलों में जाने को मजबूर
दिल्ली में हज़ारों छात्र नियमित स्कूल के बजाय शाम के स्कूलों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह केवल शिक्षा का मामला नहीं, बल्कि गरीबी, सामाजिक असमानता और परिवारिक जिम्मेदारियों की कहानी भी है। शाम के स्कूल, जो सामान्यतः आधिकारिक समय के बाद चलते हैं, गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षित करने का माध्यम बन चुके हैं।
शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, इन बच्चों में से कई को दिन के समय काम करना पड़ता है ताकि वे अपने परिवार की आर्थिक मदद कर सकें। कुछ बच्चे छोटे-मोटे व्यवसाय, घरेलू काम या ट्यूशन से परिवार की आय में योगदान देते हैं। इस वजह से वे केवल शाम के समय ही स्कूल जा पाते हैं।
समाजशास्त्रियों का कहना है कि यह समस्या केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। आर्थिक कठिनाईयों के कारण बच्चों को मानसिक और शारीरिक दबाव झेलना पड़ता है। हालांकि शाम के स्कूल उन्हें शिक्षा तो देते हैं, लेकिन यह उनकी सामान्य विकास प्रक्रिया और खेल-कूद, सामाजिक गतिविधियों तक पहुँच को सीमित कर देता है।
दिल्ली सरकार ने इस चुनौती को देखते हुए विशेष शाम स्कूल और सीखने के केंद्र खोले हैं। यहां बच्चों को न केवल पढ़ाई बल्कि स्किल डेवलपमेंट और करियर गाइडेंस भी मिलता है। इसके बावजूद, विशेषज्ञ मानते हैं कि समस्या की जड़ गरीबी और सामाजिक असमानता है, जिसे केवल स्कूल खोलकर पूरी तरह हल नहीं किया जा सकता।
“यह गरीबी की कहानी है,” एक शिक्षक ने कहा। “हमारी कोशिश है कि इन बच्चों को पढ़ाई के अवसर मिलें, लेकिन जब जीवन के लिए संघर्ष करना ही प्राथमिकता बन जाए, तो शिक्षा पीछे छूट जाती है।”