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पुजारी, MBA ग्रेजुएट, ट्यूटर: 14 करोड़ रुपये के दिल्ली 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में 5 और लोग गिरफ्तार; सिंडिकेट कंबोडिया और नेपाल से ऑपरेट हो रहा था।

Crime  •  👁 15 views  •  24 Jan 2026
पुजारी, MBA ग्रेजुएट, ट्यूटर: 14 करोड़ रुपये के दिल्ली 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में 5 और लोग गिरफ्तार; सिंडिकेट कंबोडिया और नेपाल से ऑपरेट हो रहा था।
नई दिल्ली — दिल्ली में सामने आए 14 करोड़ रुपये के ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में एक पुजारी, एक MBA ग्रेजुएट और एक प्राइवेट ट्यूटर जैसे अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, यह संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट कंबोडिया और नेपाल से ऑपरेट किया जा रहा था।
दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट के मुताबिक, आरोपी खुद को CBI, ED या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते थे और उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में होने का डर दिखाते थे। पीड़ितों से कहा जाता था कि वे जांच के दौरान घर से बाहर न निकलें और अपने बैंक खातों की जानकारी साझा करें। डर और मानसिक दबाव में आकर कई लोग अपनी जमा पूंजी, एफडी और लोन की रकम तक ट्रांसफर कर देते थे।
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी मनी म्यूल नेटवर्क के रूप में काम कर रहे थे। ये लोग अपने या दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाते थे, ताकि पैसे की असली ट्रेल छिपाई जा सके। पुलिस ने इनके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी बरामद किए हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट के मास्टरमाइंड भारत से बाहर बैठे हैं और भारत में मौजूद आरोपी केवल लो-लेवल ऑपरेटर हैं। कंबोडिया और नेपाल में मौजूद कॉल सेंटर्स से स्क्रिप्टेड कॉल की जाती थीं, जिनमें फर्जी केस और गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता था।
निष्कर्ष
दिल्ली का यह ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामला दिखाता है कि साइबर अपराध अब पढ़े-लिखे और अलग-अलग पेशों से जुड़े लोगों को भी अपने जाल में शामिल कर रहा है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती, और ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।