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CBSE का बड़ा फैसला: एफिलिएटेड स्कूलों में मेंटल हेल्थ और करियर काउंसलर अनिवार्य

Education  •  👁 19 views  •  24 Jan 2026
 CBSE का बड़ा फैसला: एफिलिएटेड स्कूलों में मेंटल हेल्थ और करियर काउंसलर अनिवार्य
नई दिल्ली — छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की दिशा को मजबूत करने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक अहम कदम उठाया है। बोर्ड ने अपने सभी एफिलिएटेड स्कूलों में मेंटल हेल्थ काउंसलर और करियर काउंसलर की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला बढ़ते शैक्षणिक दबाव, परीक्षा तनाव और करियर को लेकर असमंजस से जूझ रहे छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
CBSE के अनुसार, स्कूलों में काउंसलिंग की व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को भावनात्मक सहयोग, मानसिक संतुलन और सही करियर मार्गदर्शन प्रदान करना है। बोर्ड का मानना है कि केवल अकादमिक प्रदर्शन पर फोकस करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों की मेंटल वेलबीइंग भी उतनी ही जरूरी है। हाल के वर्षों में बच्चों और किशोरों में एंग्जायटी, डिप्रेशन और बर्नआउट के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसे देखते हुए यह निर्णय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
नई गाइडलाइंस के तहत, स्कूलों को प्रशिक्षित और योग्य काउंसलर नियुक्त करने होंगे। ये काउंसलर छात्रों को परीक्षा तनाव से निपटने, आत्मविश्वास बढ़ाने, व्यवहार संबंधी समस्याओं को समझने और करियर विकल्पों की सही जानकारी देने में मदद करेंगे। साथ ही, माता-पिता और शिक्षकों के साथ समन्वय बनाकर छात्रों के समग्र विकास पर काम किया जाएगा।
करियर काउंसलिंग के जरिए छात्रों को उनकी रुचि, योग्यता और बदलते जॉब मार्केट के अनुसार मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि वे कक्षा 10 और 12 के बाद सोच-समझकर विषय और करियर का चुनाव कर सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे गलत फैसलों, ड्रॉपआउट और करियर को लेकर होने वाले तनाव में कमी आएगी।
निष्कर्ष
CBSE का यह निर्णय शिक्षा प्रणाली में एक छात्र-केंद्रित और संवेदनशील बदलाव का संकेत है। मेंटल हेल्थ और करियर काउंसलिंग को अनिवार्य बनाकर बोर्ड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वस्थ मन और स्पष्ट भविष्य दृष्टि ही सच्ची शिक्षा की नींव हैं। यह कदम लाखों छात्रों के लिए सकारात्मक और दूरगामी असर वाला साबित हो सकता है।