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अमर्त्य सेन का बंगाल में SIR पर हमला: बोले— ‘समय कम है, कम गिनती से बीजेपी को होगा फायदा’

Crime  •  👁 16 views  •  24 Jan 2026
 अमर्त्य सेन का बंगाल में SIR पर हमला: बोले— ‘समय कम है, कम गिनती से बीजेपी को होगा फायदा’
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि मतदाता सूची के इस विशेष पुनरीक्षण के लिए समय बेहद कम रखा गया है, जिससे बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम छूटने का खतरा है। सेन के अनुसार, ऐसी स्थिति का राजनीतिक लाभ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिल सकता है।
अमर्त्य सेन ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद निष्पक्ष और समावेशी चुनाव प्रक्रिया पर टिकी होती है। यदि मतदाता सूची में संशोधन जल्दबाजी में किया जाता है और आम लोगों को पर्याप्त समय व जानकारी नहीं दी जाती, तो यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि SIR के तहत विशेष तौर पर गरीब, प्रवासी मजदूर, अल्पसंख्यक और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के मतदाता प्रभावित हो सकते हैं।
सेन ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जहां आबादी का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र से जुड़ा है, वहां दस्तावेज़ी औपचारिकताओं के कारण लोगों का नाम मतदाता सूची से हट जाना आसान हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव नज़दीक हैं, तो इतनी अहम प्रक्रिया के लिए पर्याप्त तैयारी और पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई जा रही।
उनका मानना है कि मतदाता सूची में कमी या गड़बड़ी से वोटिंग प्रतिशत घट सकता है, और कम मतदान का फायदा आमतौर पर उस पार्टी को मिलता है जिसकी कोर वोट बैंक मजबूत होती है। सेन ने बिना किसी दल का नाम लिए कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इससे बीजेपी को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।
इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में बहस तेज हो गई है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने सेन की चिंताओं का समर्थन किया है, जबकि विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण जरूरी है।
निष्कर्ष:
अमर्त्य सेन की टिप्पणी ने SIR प्रक्रिया को लेकर लोकतंत्र, निष्पक्षता और समयबद्धता के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। यह बहस आने वाले चुनावों से पहले मतदाता अधिकार और चुनावी पारदर्शिता पर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है।