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अमर्त्य सेन ने बंगाल में SIR पर निशाना साधा: ‘समय की कमी, कम हिसाब-किताब से BJP को फ़ायदा होगा’

Crime  •  👁 9 views  •  24 Jan 2026
अमर्त्य सेन ने बंगाल में SIR पर निशाना साधा: ‘समय की कमी, कम हिसाब-किताब से BJP को फ़ायदा होगा’
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन निर्वाचन सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर आलोचना और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि यह प्रक्रिया अनावश्यक जल्दबाजी में की जा रही है और इसे पूरा करने के लिए मतदाताओं को पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा, जिससे लोकतांत्रिक भागीदारी को खतरा उत्पन्न हो सकता है। सेन ने यह टिप्पणी बोस्टन से PTI के साथ इंटरव्यू में की, जहाँ उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले SIR परियोजना को इतनी जल्दी पूरा करना न्यायसंगत और लोकतंत्र के लिए अनुचित है।
अमर्त्य सेन ने स्पष्ट किया कि यदि निर्वाचन सूची का पुनरीक्षण सावधानीपूर्वक और पर्याप्त समय के साथ किया जाए तो वह लोकतंत्र को मजबूत कर सकता है, लेकिन बंगाल में यह ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध कराना कई लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जन्मे लोगों के लिए जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र जैसे कागजात नहीं होते हैं। ऐसे में निर्वाचन प्रक्रिया से वंचित होने का जोखिम बढ़ जाता है, जो लोकतांत्रिक भागीदारी को कमजोर कर सकता है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस प्रक्रिया से किसी राजनीतिक दल को फायदा हो सकता है, तो सेन ने कहा कि वे चुनाव विशेषज्ञ नहीं हैं, लेकिन उन्होंने कहा है कि जिन लोगों से उन्होंने बात की है, उनके अनुसार बीजेपी (BJP) को कम हिसाब‑किताब के कारण फायदा हो सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की अखंडता सबसे जरूरी है, चाहे किसी भी दल को फायदा हो या नुकसान।
सेन के इन बयानों के बाद राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है, खासकर जब बंगाल में SIR को लेकर मतदाताओं और नेताओं के बीच चिंता और विरोध के स्वर भी उभर रहे हैं। उनके बयान ने यह तर्क दिया है कि मतदाता सूची से बाहर होने की संभावनाएँ, खासकर कमजोर वर्गों के लिए, लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत हैं और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।