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आर्टिकल 21 अवैध कब्जे की रक्षा नहीं करता: ओडिशा हाई कोर्ट ने सार्वजनिक ज़मीन से बेदखली के खिलाफ याचिका खारिज की

Crime  •  👁 14 views  •  24 Jan 2026
आर्टिकल 21 अवैध कब्जे की रक्षा नहीं करता: ओडिशा हाई कोर्ट ने सार्वजनिक ज़मीन से बेदखली के खिलाफ याचिका खारिज की
कटक – ओडिशा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि संविधान का अनुच्छेद 21 (आर्टिकल 21) सार्वजनिक ज़मीन पर किए गए अवैध कब्जे की रक्षा नहीं करता। कोर्ट ने सार्वजनिक भूमि से बेदखली के खिलाफ दायर एक व्यक्ति की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी थी कि वर्षों से उस ज़मीन पर रहने के कारण उसे जीवन और आजीविका के अधिकार के तहत संरक्षण मिलना चाहिए। उसने आर्टिकल 21 का हवाला देते हुए कहा कि बेदखली से उसका मौलिक अधिकार प्रभावित होगा।
हालांकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जीवन का अधिकार अवैध कृत्य को वैध नहीं बना सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक ज़मीन पर अतिक्रमण कानून के खिलाफ है और ऐसे मामलों में राज्य को ज़मीन खाली कराने का पूरा अधिकार है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर अवैध कब्जे को मौलिक अधिकारों की आड़ में संरक्षण दिया जाए, तो इससे कानून का शासन कमजोर होगा और सार्वजनिक संसाधनों पर अनुचित दबाव पड़ेगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि सरकार का कर्तव्य है कि वह सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराए ताकि उसका उपयोग जनहित में किया जा सके।
अदालत ने यह भी जोड़ा कि यदि कोई व्यक्ति वास्तव में बेदखली से प्रभावित होता है, तो वह पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था के लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर सकता है, लेकिन अवैध कब्जे को मौलिक अधिकार बताकर चुनौती नहीं दी जा सकती।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख को मजबूती देगा।