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13 करोड़ रुपये के ऑक्सीजन प्लांट पेमेंट विवाद में EOW ने चार साल बाद एफआईआर दर्ज की — क्या है पूरा मामला?

Crime  •  👁 11 views  •  24 Jan 2026
13 करोड़ रुपये के ऑक्सीजन प्लांट पेमेंट विवाद में EOW ने चार साल बाद एफआईआर दर्ज की — क्या है पूरा मामला?
नई दिल्ली — दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing — EOW) ने कोविड‑19 महामारी के दौरान रक्षा मंत्रालय (MoD) के अस्पतालों में ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांटों की इंस्टॉलेशन से जुड़े भुगतान विवाद में मामला दर्ज किया है, करीब चार साल बाद एक फर्म की शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है।
मामला Katyayani Enterprises नामक कंपनी की शिकायत पर दर्ज किया गया है। आरोप है कि वर्ष 2021 में इस फर्म ने मुंबई स्थित Medion Healthcare के साथ मिलकर देश भर के कई MoD अस्पतालों में 23 स्टैटिक ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए थे। इसके लिए कुल करीब ₹19.07 करोड़ का टैक्स चालान (invoice) बनाया गया, लेकिन कथित रूप से Viskho Corporation द्वारा केवल ₹5.58 करोड़ ही भुगतान किया गया, और बाकी बकाया चार वर्षों से पेंडिंग रहा।
शिकायत में यह भी दावा किया गया कि जब कंपनी ने बकाया भुगतान के लिए बार‑बार सूचना दी, तो Viskho का यह तर्क था कि MoD ने भुगतान मंज़ूर नहीं किया है, जबकि MoD ने Katyayani Enterprises को बताया कि पूरी राशि Viskho को ही पहले ही भुगतान कर दी गई थी। बाद में Viskho ने April 2022 में एक पोस्ट‑डेटेड चेक दिया, जो बाउंस हो गया।
इस भुगतान विवाद पर 9 जनवरी 2026 को EOW ने FIR दर्ज की और मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने “कुछ प्लांटों में खराबी” जैसा बहाना बनाकर भुगतान रोक रखा था, जबकि वास्तविकता में यह बकाया बिल साफ़ किए जाने से मौक़ा टाला जा रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार, महामारी के दौरान ऑक्सीजन उत्पादन और आपूर्ति प्रोजेक्ट्स में तेजी से अनुबंध दिए गए थे, जिसके कारण भुगतान अनुशासन और डील वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं में कमियों के कारण विवाद भी बढ़े। ऐसे मामलों में वापसी, भुगतान और कानूनी कार्रवाई का सही समय स्पष्ट रूप से तय होना जरूरी है ताकि आपूर्तिकर्ताओं का हक़ सुरक्षित रहे और सरकार की आपातकालीन खरीद प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
📌 निष्कर्ष: आर्थिक अपराध शाखा ने चार साल बाद ऑक्सीजन प्लांट भुगतान विवाद में FIR दर्ज कर लगभग ₹13 करोड़ के पेंडिंग भुगतान को लेकर जांच शुरू की है। मामला प्रदर्शित करता है कि महामारी काल की आपातकालीन आपूर्ति से जुड़े वित्तीय विवादों पर मामलों को अब भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है।