The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 हिलसा में महाशिवरात्रि को लेकर ब्रह्माकुमारी बहनों की भव्य चैतन्य शोभायात्रा, नगर हुआ भक्तिमय     🔴 खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर खेत में दफनाया शव, ऊपर बो दी गेहूं की फसल; दो महीने बाद खुला राज     🔴 पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहुँचे स्वामी विवेकानंद अवार्ड सेरेमनी में     🔴 बाँका में DM और SP ने किया EVM/VVPAT वेयर हाउस का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा     🔴 लखीसराय पुलिस ने जारी किया पोस्टर, 14 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी लापता     🔴 मद्य निषेध के तहत बड़ी कार्रवाई, 69 लीटर अवैध शराब बरामद     🔴 दरभंगा में 6 साल की मासूम से दरिंदगी, इलाके में आक्रोश—आरोपी को कड़ी सजा की मांग     🔴 एकरससराय स्थित प्रसिद्ध आंगारी धाम की धर्मशाला जर्जर, हादसे का खतरा बढ़ा     🔴 अहमदाबाद के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल में लगातार घटनाएँ, अभिभावकों में गहरी चिंता     🔴 खुदागंज थाना पहुंचा भटकता मिला 8 वर्षीय बालक, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस कर रही पहचान की कोशिश    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

‘कोई सचिन नहीं है’: दिल्ली पुलिस ने खोला विदेशी गैंग का खौफनाक तरीका — बेरोज़गार युवाओं को शूटर के लिए ‘घोस्ट’ नाम और एन्क्रिप्टेड ऐप से भर्ती

Crime  •  👁 16 views  •  24 Jan 2026
 ‘कोई सचिन नहीं है’: दिल्ली पुलिस ने खोला विदेशी गैंग का खौफनाक तरीका — बेरोज़गार युवाओं को शूटर के लिए ‘घोस्ट’ नाम और एन्क्रिप्टेड ऐप से भर्ती
नई दिल्ली — दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध गिरोह के नए तरीके का पर्दाफ़ाश किया है जिसमें विदेश में बैठे अपराधी बेरोज़गार युवाओं को शूटिंग जैसे खतरनाक कामों के लिए हायर करते हैं और इसके लिए ‘सचिन’ या ‘सुमित’ जैसे नकली (घोस्ट) नामों और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। यह खुलासा पुलिस की जांच के दौरान हुआ, जब रंगदारी और फायरिंग से जुड़े मामलों की पड़ताल की जा रही थी।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य अक्सर Zangi, Signal और अन्य एन्क्रिप्टेड चैट प्लेटफॉर्म के ज़रिये खुद को “सचिन” या “सुमित” बताकर स्थानीय युवाओं से संपर्क करते हैं। इन युवाओं से कहा जाता है कि उन्हें किसी व्यवसायी या लक्ष्य की गोलियां चलानी हैं, उसके लिए वे पहले एक जगह से हथियार ले, और बाद में उसे किसी अन्य स्थान पर छोड़ दें। ऐसा करने वाले “शूटर” को पैसे देने का वादा किया जाता है, लेकिन उन्हें हकीकत में उस गिरोह के असली नेताओं का पता नहीं चलता।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच की टीमों ने इस तरह के मामलों की जांच में पाया कि यह गैंग विदेश से ही ऑपरेट कर रहा है और सभी सदस्य अलग‑अलग लोग होते हुए भी एक एक ही नकली पहचान के पीछे काम करते हैं, ताकि जांच को गुमराह किया जा सके और पुलिस को सही स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह टेक्नोलॉजी‑सक्षम और सावधानी से योजनाबद्ध तरीके से काम करता है, जिससे आम युवा फँस कर गंभीर अपराध में शामिल हो जाते हैं। इन शूटरों को भुगतान किया जाता है लेकिन वे यह नहीं जानते कि वे किससे कमांड ले रहे हैं और असली मास्टरमाइंड कौन है।
दिल्ली पुलिस अब ऐसे मामलों में निगरानी बढ़ा रही है और स्थानीय युवाओं को एन्क्रिप्टेड ऐप्स से संदेहजनक कॉल या संदेश मिलने पर तुरंत पुलिस से शिकायत करने की सलाह दी है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह की पहचान, उसके नेटवर्क की तह तक पहुँचने और मास्टरमाइंडों को पकड़ने के लिए तकनीकी जाँच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
📌 निष्कर्ष: यह मामला बताता है कि कैसे आधुनिक तकनीक और ग्लोबल संचार के ज़रिये अपराधी गिरोह बेरोज़गार युवाओं को आकर्षक वादों के साथ खतरनाक भूमिकाओं के लिए उकसाते हैं, और इससे निपटने के लिए कड़े मॉनिटरिंग, पुलिस जाँच और साइबर‑सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।