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डिकोड पॉलिटिक्स: हाउस एड्रेस पर गवर्नर बनाम विपक्ष के बीच झगड़े के बीच, संविधान और कोर्ट क्या कहते हैं?

Politics   •   👁 30 views   •   24 Jan 2026
डिकोड पॉलिटिक्स: हाउस एड्रेस पर गवर्नर बनाम विपक्ष के बीच झगड़े के बीच, संविधान और कोर्ट क्या कहते हैं?
हाल के दिनों में कई राज्यों में हाउस एड्रेस (राज्यपाल का अभिभाषण) को लेकर गवर्नर और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला है। विधानसभा सत्र की शुरुआत में दिए जाने वाले इस संबोधन पर सियासी घमासान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संविधान इस बारे में क्या कहता है और अदालतों का रुख क्या रहा है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 176 के तहत राज्यपाल को विधानसभा के पहले सत्र में अभिभाषण देना होता है। यह संबोधन राज्य सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों को प्रस्तुत करता है। संवैधानिक रूप से, राज्यपाल यह भाषण मंत्रिपरिषद की सलाह पर देते हैं, यानी इसकी सामग्री सरकार तय करती है, न कि राज्यपाल व्यक्तिगत रूप से।
विवाद तब खड़ा होता है जब राज्यपाल भाषण के कुछ हिस्सों को पढ़ने से इनकार करते हैं या विपक्ष हंगामा कर अभिभाषण बाधित करता है। विपक्ष का तर्क होता है कि यह सरकार का राजनीतिक एजेंडा है, जबकि सरकार इसे संवैधानिक परंपरा बताती है।
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट कई मामलों में स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्यपाल एक संवैधानिक प्रमुख हैं और उन्हें मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करना चाहिए। अदालतों ने यह भी कहा है कि अभिभाषण से इनकार या उसमें मनमाना बदलाव संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ हो सकता है। वहीं, विपक्ष द्वारा अभिभाषण के दौरान व्यवधान को भी लोकतांत्रिक शिष्टाचार के विरुद्ध माना गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाउस एड्रेस केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि विधायी और कार्यपालिका के बीच संतुलन का प्रतीक है। इसमें टकराव लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को प्रभावित करता है।
कुल मिलाकर, संविधान और अदालत दोनों यही संकेत देते हैं कि राज्यपाल, सरकार और विपक्ष—तीनों को संवैधानिक सीमाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करना चाहिए, ताकि विधानसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके।