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अरावली की परिभाषा पर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने ‘100 मीटर नियम’ को मानने वाले आदेश पर लगाई रोक

Crime  •  👁 16 views  •  29 Dec 2025
अरावली की परिभाषा पर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने ‘100 मीटर नियम’ को मानने वाले आदेश पर लगाई रोक
अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम हस्तक्षेप किया है। शीर्ष अदालत ने उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें अरावली क्षेत्र को तय करने के लिए ‘100 मीटर नियम’ को स्वीकार किया गया था। यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और विकास गतिविधियों के बीच संतुलन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दरअसल, हरियाणा और राजस्थान में अरावली क्षेत्र की पहचान को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। कुछ आदेशों में यह कहा गया था कि अरावली की सीमा पहाड़ियों से 100 मीटर के दायरे तक मानी जाए। इस नियम के आधार पर कई क्षेत्रों को अरावली का हिस्सा मानने से बाहर कर दिया गया, जिससे वहां निर्माण और खनन जैसी गतिविधियों का रास्ता खुल गया।
इस पर पर्यावरण कार्यकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि ‘100 मीटर नियम’ अरावली की वैज्ञानिक और भौगोलिक परिभाषा के खिलाफ है और इससे इस प्राचीन पर्वतमाला को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। अरावली न केवल जैव विविधता का अहम केंद्र है, बल्कि यह उत्तर भारत के पर्यावरणीय संतुलन, भूजल संरक्षण और जलवायु नियंत्रण में भी बड़ी भूमिका निभाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल इस नियम को स्वीकार करने वाले आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने संकेत दिया है कि अरावली की परिभाषा तय करते समय पर्यावरणीय पहलुओं, वैज्ञानिक तथ्यों और पूर्व के न्यायिक निर्णयों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इस फैसले से अरावली क्षेत्र में चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। साथ ही, यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो अरावली के भविष्य की दिशा तय करेगा।