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‘एंटीबायोटिक की सप्लाई खतरनाक स्तर तक घट रही है’: एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर एक्सपर्ट की गंभीर चेतावनी

Health  •  👁 11 views  •  24 Jan 2026
‘एंटीबायोटिक की सप्लाई खतरनाक स्तर तक घट रही है’: एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर एक्सपर्ट की गंभीर चेतावनी
दुनिया भर में एंटीबायोटिक दवाओं की घटती उपलब्धता और बढ़ता एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है। हाल ही में एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि एंटीबायोटिक की सप्लाई “खतरनाक तरीके से कम” हो रही है, जो भविष्य में सामान्य संक्रमणों के इलाज को भी मुश्किल बना सकती है।
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस वह स्थिति है, जब बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीव दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। इसका सीधा असर यह होता है कि पहले जिन बीमारियों का इलाज आसानी से हो जाता था, वे अब जानलेवा साबित हो सकती हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, एंटीबायोटिक का अत्यधिक और गलत इस्तेमाल, बिना डॉक्टर की सलाह दवाएं लेना और पशुपालन में एंटीबायोटिक का अनियंत्रित उपयोग इस संकट को और गहरा कर रहा है।
इसके साथ ही, नई एंटीबायोटिक दवाओं के शोध और उत्पादन में भी भारी कमी देखी जा रही है। फार्मा कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश से पीछे हट रही हैं, क्योंकि नई दवाओं का विकास महंगा है और मुनाफा सीमित माना जाता है। नतीजतन, बाजार में मौजूद एंटीबायोटिक पर ही निर्भरता बढ़ रही है, जिन पर बैक्टीरिया तेजी से असरहीन हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में सर्जरी, कैंसर इलाज और सामान्य संक्रमणों का उपचार भी जोखिम भरा हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठनों ने सरकारों से एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग, जन-जागरूकता बढ़ाने और नए शोध को प्रोत्साहन देने की अपील की है।
भारत जैसे देशों में, जहां संक्रमण का बोझ अधिक है, यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से निपटने के लिए सरकार, डॉक्टर, फार्मा उद्योग और आम जनता—सभी को मिलकर तुरंत और समन्वित प्रयास करने की जरूरत है।