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‘गांव की सड़क’ का कोई सबूत नहीं: तेलंगाना हाई कोर्ट ने GHMC का 2014 का नोटिस रद्द किया

Crime  •  👁 6 views  •  23 Jan 2026
‘गांव की सड़क’ का कोई सबूत नहीं: तेलंगाना हाई कोर्ट ने GHMC का 2014 का नोटिस रद्द किया
तेलंगाना हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (GHMC) द्वारा वर्ष 2014 में जारी उस नोटिस को रद्द कर दिया है, जिसमें एक गेटेड कम्युनिटी की बाउंड्री वॉल गिराने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है कि संबंधित भूमि पर कोई “गांव की सड़क” मौजूद थी।
यह मामला उस समय सामने आया था जब GHMC ने दावा किया कि गेटेड कम्युनिटी की दीवार एक सार्वजनिक ग्रामीण सड़क पर अवैध रूप से बनाई गई है। इसके आधार पर नगर निकाय ने दीवार हटाने का नोटिस जारी किया था। हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि जमीन कानूनी रूप से निजी स्वामित्व में है और वहां किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सड़क का अस्तित्व नहीं रहा है।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि GHMC अपने दावे के समर्थन में राजस्व रिकॉर्ड, सर्वे दस्तावेज या अन्य ठोस साक्ष्य पेश करने में असफल रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल अनुमान या पुराने दावों के आधार पर निजी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी संरचना को गिराने जैसे गंभीर कदम से पहले प्रशासन को उचित प्रक्रिया, स्पष्ट सबूत और कानूनी आधार सुनिश्चित करना चाहिए। इस तरह की कार्रवाई से नागरिकों के संपत्ति के अधिकार और कानूनी सुरक्षा प्रभावित होती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला शहरी क्षेत्रों में गेटेड कम्युनिटी, भूमि विवाद और नगर निकाय की शक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल है। इससे यह संदेश जाता है कि बिना पुख्ता सबूत के प्रशासनिक आदेशों को न्यायिक समीक्षा में टिके रहना मुश्किल है।