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इलाहाबाद हाई कोर्ट का वकीलों को निर्देश: क्लाइंट के लिए बेवजह याचिकाएँ न दायर करें

Crime  •  👁 13 views  •  23 Jan 2026
इलाहाबाद हाई कोर्ट का वकीलों को निर्देश: क्लाइंट के लिए बेवजह याचिकाएँ न दायर करें
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वकीलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे सिर्फ अपने क्लाइंट का प्रवक्ता नहीं बनकर काम करें, बल्कि अदालत का समय और न्याय प्रक्रिया का सम्मान भी करें। कोर्ट ने कहा कि बिना कारण या तर्कहीन याचिकाएँ दायर करना गंभीर मुद्दा है और इससे न्याय प्रक्रिया में देरी होती है।
हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी ऐसे मामलों के संदर्भ में की, जहाँ वकील केवल प्रक्रिया पूरी करने के लिए अनावश्यक या बेवजह याचिकाएँ अदालत में पेश करते हैं। न्यायालय ने वकीलों से कहा कि उन्हें अपने पेशे का पात्र और जिम्मेदार उपयोग करना चाहिए और केवल सटीक तथ्यों और वैध कारणों के साथ याचिकाएँ प्रस्तुत करनी चाहिए।
कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश ने कहा कि वकील का कर्तव्य केवल क्लाइंट के पक्ष में बहस करना नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और समय का सम्मान करना भी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बेवजह याचिकाएँ दायर करना कोर्ट और समाज दोनों के लिए हानिकारक है, क्योंकि इससे मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी होती है और न्याय की गति प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्देश भारतीय न्याय प्रणाली में न्यायिक अनुशासन और पेशेवर जिम्मेदारी को मजबूत करने का प्रयास है। वकीलों को केवल अपने क्लाइंट की सेवा के लिए नहीं बल्कि न्याय प्रक्रिया को सुचारु और प्रभावी बनाने के लिए भी काम करना चाहिए।
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह कदम वकीलों और कानून के छात्रों दोनों के लिए एक चेतावनी और मार्गदर्शन है। इससे न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और समय की बचत सुनिश्चित होगी।