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‘मुझे नींद नहीं आती, फाइलों के बारे में बुरे सपने आते हैं’: दिल्ली की अदालतों में अहलमद अत्यधिक थकान के शिकार, एक आत्महत्या ने संकट को किया उजागर

Crime  •  👁 10 views  •  23 Jan 2026
‘मुझे नींद नहीं आती, फाइलों के बारे में बुरे सपने आते हैं’: दिल्ली की अदालतों में अहलमद अत्यधिक थकान के शिकार, एक आत्महत्या ने संकट को किया उजागर
दिल्ली की निचली अदालतों में काम करने वाले अहलमद (कोर्ट क्लर्क) इन दिनों गंभीर मानसिक और शारीरिक थकान से जूझ रहे हैं। बढ़ते काम का बोझ, लंबित मामलों का दबाव और सीमित संसाधनों के बीच काम करने की मजबूरी ने उनकी स्थिति को चिंताजनक बना दिया है। हाल ही में एक अहलमद की आत्महत्या ने इस छिपे हुए संकट को और स्पष्ट कर दिया है।
कई अहलमदों का कहना है कि उन्हें रात में नींद नहीं आती और फाइलों, तारीखों और आदेशों से जुड़े बुरे सपने आते हैं। अदालतों में रोज़ाना सैकड़ों मामलों की जिम्मेदारी, रिकॉर्ड संभालने का दबाव और समयसीमा का तनाव उनकी मानसिक सेहत पर गहरा असर डाल रहा है। एक कर्मचारी ने बताया कि काम का बोझ इतना अधिक है कि निजी जीवन लगभग खत्म हो चुका है।
दिल्ली की अदालतों में अहलमद न्यायिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। केस फाइलों का रखरखाव, तारीखों की एंट्री, आदेशों का संकलन और न्यायाधीशों को प्रशासनिक सहयोग देना—इन सभी जिम्मेदारियों का भार सीमित स्टाफ पर है। इसके बावजूद पदों की कमी और नई भर्तियों में देरी हालात को और खराब कर रही है।
सहकर्मी की आत्महत्या के बाद कर्मचारियों के बीच डर और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। कई लोगों ने प्रशासन से मानसिक स्वास्थ्य सहायता, स्टाफ की संख्या बढ़ाने और काम के घंटों को संतुलित करने की मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
यह मामला न केवल अदालतों के आंतरिक कामकाज, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र में कर्मचारियों की मानसिक सेहत और कार्य स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।