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स्कूल फीस रेगुलेशन कानून पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, लागू करने के शेड्यूल को लेकर दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

law  •  👁 13 views  •  20 Jan 2026
स्कूल फीस रेगुलेशन कानून पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, लागू करने के शेड्यूल को लेकर दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए बनाए गए स्कूल फीस रेगुलेशन कानून को लागू करने के शेड्यूल को लेकर अब दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट (SC) की जांच का सामना करना पड़ रहा है। शीर्ष अदालत ने कानून के क्रियान्वयन में हो रही देरी और समय-सीमा को लेकर सरकार से जवाब तलब किया है। इस मामले को लाखों अभिभावकों से जुड़ा अहम मुद्दा माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली सरकार ने स्कूल फीस रेगुलेशन कानून तो बना दिया, लेकिन इसे ज़मीन पर लागू करने के लिए स्पष्ट और प्रभावी शेड्यूल तय नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून के लागू न होने का सीधा नुकसान अभिभावकों को हो रहा है, क्योंकि कई निजी स्कूल अब भी मनमाने ढंग से फीस बढ़ा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि आखिर कानून लागू करने में इतना समय क्यों लग रहा है और अब तक इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि शिक्षा एक संवेदनशील विषय है और इससे जुड़े कानूनों में अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं हो सकती। अदालत ने संकेत दिए कि यदि सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो वह सख्त रुख अपना सकती है।

दिल्ली सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियम और प्रक्रियाएं तैयार की जा रही हैं। साथ ही स्कूलों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों से सुझाव भी लिए जा रहे हैं। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क पर असंतोष जताते हुए स्पष्ट किया कि केवल प्रक्रियाओं का हवाला देकर कानून को लटकाया नहीं जा सकता।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली में हर साल निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी को लेकर विवाद खड़ा होता है। स्कूल फीस रेगुलेशन कानून का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और अभिभावकों को राहत देना है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी से अब उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली सरकार जल्द ही इस कानून को तय समय-सीमा के भीतर प्रभावी रूप से लागू करेगी, जिससे अभिभावकों को वास्तविक राहत मिल सके।