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'बिना ट्रायल के पांच साल अन्याय है': JLF पैनल ने उमर खालिद की जमानत मामले पर बहस की

law  •  👁 18 views  •  17 Jan 2026
'बिना ट्रायल के पांच साल अन्याय है': JLF पैनल ने उमर खालिद की जमानत मामले पर बहस की
शनिवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में लंबे समय तक जेल, बोलने की आज़ादी और भारत के आतंकवाद विरोधी कानूनों से जुड़े सवाल उठे, जब कानूनी जानकारों और पूर्व पॉलिसी बनाने वालों के एक पैनल ने मौजूदा संवैधानिक समय में न्याय के मतलब पर बहस की।
यह चर्चा 'द मेज़र ऑफ़ जस्टिस' नाम के एक सेशन के दौरान हुई, जिसमें सीनियर एडवोकेट वृंदा ग्रोवर, पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार और अमेरिका में रहने वाले जज केतु शाह ने पत्रकार सुधा सदानंद के साथ बातचीत की। इस सेशन में कई मुद्दों पर बात हुई, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत हाल ही में जमानत के फैसले और उनके बड़े कानूनी असर शामिल थे।
लंबे समय तक कैद और आतंकवाद कानून का इस्तेमाल
2020 दिल्ली दंगों की साज़िश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत न मिलने के सवाल पर जवाब देते हुए ग्रोवर ने तर्क दिया कि अलग-अलग नामों पर ज़ोर देने से एक बड़ा पैटर्न छिप जाता है।