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‘यूएसए’ यानी ‘उमरती सिकलीगर आर्म्स’: बंदूकों की पहचान से बाहर निकलता एमपी का गांव, बदलाव की नई कहानी

Crime  •  👁 26 views  •  27 Dec 2025
‘यूएसए’ यानी ‘उमरती सिकलीगर आर्म्स’: बंदूकों की पहचान से बाहर निकलता एमपी का गांव, बदलाव की नई कहानी
मध्य प्रदेश का एक छोटा-सा गांव उमरती, जिसे लंबे समय तक ‘यूएसए’ यानी ‘उमरती सिकलीगर आर्म्स’ के नाम से जाना जाता था, अब अपनी पहचान बदलने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। कभी यह गांव अवैध हथियार निर्माण और बंदूक संस्कृति के लिए कुख्यात था, लेकिन अब यहां विकास, शिक्षा और रोजगार की नई कहानी लिखी जा रही है।
उमरती गांव में सिकलीगर समुदाय की बड़ी आबादी रहती है, जो पीढ़ियों से हथियार बनाने के पारंपरिक काम से जुड़ी रही। समय के साथ यह परंपरा अवैध गतिविधियों से जुड़ गई और गांव की छवि अपराध के केंद्र के रूप में बन गई। इसी कारण इसे व्यंग्यात्मक रूप से ‘यूएसए’ कहा जाने लगा। हालांकि, हाल के वर्षों में प्रशासन, सामाजिक संगठनों और स्वयं ग्रामीणों के प्रयासों से हालात बदलने लगे हैं।
सरकार द्वारा चलाए गए पुनर्वास और कौशल विकास कार्यक्रमों ने गांव के युवाओं को वैकल्पिक रोजगार की राह दिखाई है। बच्चों को स्कूल से जोड़ने, महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दिया गया है। कई परिवार अब मजदूरी, हस्तशिल्प, खेती और छोटे व्यवसायों की ओर रुख कर रहे हैं।
पुलिस और जिला प्रशासन की सख्ती के साथ-साथ संवाद की नीति ने भी अहम भूमिका निभाई है। अवैध हथियारों पर कार्रवाई के साथ लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए गए, जिससे विश्वास का माहौल बना। गांव में अब शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है और नई पीढ़ी बेहतर भविष्य की कल्पना कर रही है।
उमरती की यह परिवर्तन यात्रा इस बात का उदाहरण है कि सही नीति, निरंतर प्रयास और सामुदायिक भागीदारी से किसी भी क्षेत्र की छवि बदली जा सकती है। बंदूकों की छाया में बसा यह गांव अब विकास, सम्मान और नई पहचान की ओर अग्रसर है।