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रोहित और अब शुभमन गिल: कैसे गौतम गंभीर और अजीत अगरकर ने ‘स्टार कल्चर’ को लगातार नकारा

Sports  •  👁 23 views  •  27 Dec 2025
रोहित और अब शुभमन गिल: कैसे गौतम गंभीर और अजीत अगरकर ने ‘स्टार कल्चर’ को लगातार नकारा
भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से ‘स्टार कल्चर’ एक अहम हिस्सा रहा है, जहां बड़े नामों के इर्द-गिर्द टीम की रणनीति और फैसले घूमते रहे हैं। विराट कोहली, रोहित शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों का योगदान अमूल्य रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में टीम प्रबंधन के फैसलों से यह संकेत साफ मिला है कि अब नाम से ज्यादा फॉर्म, फिटनेस और टीम की जरूरत को प्राथमिकता दी जा रही है। इस बदलाव के केंद्र में हैं टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर और चयन समिति के प्रमुख अजीत अगरकर।
गौतम गंभीर अपने खेलने के दिनों से ही स्पष्ट विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। वह हमेशा मानते रहे हैं कि टीम किसी एक खिलाड़ी से बड़ी होती है। कोच बनने के बाद भी उन्होंने यही सोच लागू की। चाहे बात बड़े मैचों में सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका तय करने की हो या युवाओं को मौके देने की—गंभीर ने प्रदर्शन को ही पैमाना माना, न कि लोकप्रियता को।
अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति ने भी इसी सोच को आगे बढ़ाया। विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर जो फैसले लिए गए, उनमें भावनाओं के बजाय क्रिकेटिंग लॉजिक दिखा। उम्र, कार्यभार और आने वाले टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए टीम का संतुलन प्राथमिक रहा।
अब इस सूची में शुभमन गिल का नाम जुड़ना भी इसी नीति का संकेत है। गिल को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जाता है और वह पहले ही ‘स्टार’ का दर्जा पा चुके हैं। इसके बावजूद, टीम प्रबंधन ने उनके साथ भी वही रवैया अपनाया—जगह पक्की नहीं, प्रदर्शन जरूरी। कप्तानी, बल्लेबाजी क्रम या प्लेइंग इलेवन में स्थान—हर फैसला टीम की जरूरत और हालिया फॉर्म पर आधारित रहा।
इस पूरी प्रक्रिया से यह साफ है कि भारतीय क्रिकेट अब व्यक्तियों के बजाय संरचना और संस्कृति पर ध्यान दे रहा है। गंभीर और अगरकर की जोड़ी एक ऐसा माहौल बनाना चाहती है, जहां हर खिलाड़ी बराबरी से प्रतिस्पर्धा करे और टीम के लिए जवाबदेह हो।
यह बदलाव आसान नहीं है, क्योंकि स्टार खिलाड़ियों की लोकप्रियता फैसलों पर दबाव डालती है। लेकिन अगर यह सोच लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारतीय क्रिकेट को एक मजबूत, संतुलित और भविष्य के लिए तैयार टीम मिल सकती है—जहां नाम नहीं, बल्कि प्रदर्शन ही असली सितारा होगा।