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चुनाव और मुद्दे: जाम वाला पुणे और फ्लाईओवर इसका समाधान क्यों नहीं हैं

Politics  •  👁 9 views  •  09 Jan 2026
चुनाव और मुद्दे: जाम वाला पुणे और फ्लाईओवर इसका समाधान क्यों नहीं हैं
पुणे शहर में ट्रैफिक जाम बढ़ती जनसंख्या, तेज़ विकास और अपर्याप्त योजना के चलते एक गंभीर नागरिक समस्या बन चुका है। रोज़ाना हजारों वाहन चालक कई प्रमुख मार्गों पर घंटों जाम में फंसते हैं, जिससे शहर की खूंटा-बन्दी और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि फ्लाईओवर बनाना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि यह समस्या की गहराई को और दर्शाता है।
पिछले कुछ वर्षों में पुणे में कई फ्लाईओवर और अंडरपास का निर्माण किया गया है या चल रहा है, जैसे कि सिँहगढ़ रोड पर नये फ्लाईओवर बनने के बाद भी शहर भर में ट्रैफिक जाम बना हुआ है।स्थानीय प्रशासन ने भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे डबल-डेकर फ्लाईओवर को लगभग पूरा कर लिया है, जिसका उद्देश्य भीड़भाड़ कम करना था, लेकिन जाम की दिक्कत पूरी तरह मिट नहीं पाई।
विशेषज्ञों और शहरी योजनाकारों का कहना है कि सड़कों की क्षमता और वाहनों की संख्या के बीच संतुलन नहीं है। सिर्फ फ्लाईओवर या रोड विस्तार से समस्या का स्थायी समाधान नहीं मिल पाता, बल्कि यह कहीं और रुकावटें पैदा कर देता है और भीड़ एक बिंदु से दूसरे बिंदु पर खिंच जाती है।
इसके अलावा, अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन और ट्रैफिक प्रबंधन की कमजोरियों के कारण भी वाहन धीमी गति से चलते हैं। शहर के अंदर मेट्रो, बस नेटवर्क और कैब-शेयरिंग जैसी टिकाऊ विकल्पों का विस्तार नहीं होने से लोगों को निजी वाहनों पर ही निर्भर रहना पड़ता है, जिससे जाम और भी बढ़ता है।
यह मुद्दा आने वाले स्थानीय चुनावों में भी प्रमुख चर्चा का विषय बन गया है, जहां मतदाता बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट ट्रैफिक प्लानिंग और दीर्घकालीन समाधान की मांग कर रहे हैं। हाल के चुनाव प्रचारों में नेताओं ने फ्लाईओवर के अलावा राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण और बेहतर पब्लिक ट्रांसिट नेटवर्क जैसे प्रस्तावों पर भी जोर दिया है।
इसलिए पुणे की ट्रैफिक समस्या सिर्फ निर्माण-आधारित समाधान से हल नहीं होगी, बल्कि समग्र और दीर्घकालिक योजना, बेहतर सिटी-ट्रैफिक मैनेजमेंट तथा सार्वजनिक परिवहन के विस्तार पर ध्यान देने की आवश्यकता है।