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चुनाव और मुद्दे: जाम वाला पुणे और फ्लाईओवर इसका समाधान क्यों नहीं हैं

Politics  •  👁 21 views  •  09 Jan 2026
चुनाव और मुद्दे: जाम वाला पुणे और फ्लाईओवर इसका समाधान क्यों नहीं हैं
पुणे शहर आज गंभीर ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है। हर चुनाव में यह मुद्दा जोर-शोर से उठता है और समाधान के तौर पर फ्लाईओवर, एलिवेटेड रोड और सिग्नल-फ्री कॉरिडोर का वादा किया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इतने फ्लाईओवर बनने के बावजूद पुणे का ट्रैफिक जाम कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है।
पुणे ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह अनियंत्रित शहरी विकास है। आईटी पार्क, रिहायशी टाउनशिप और व्यावसायिक केंद्र तेजी से बढ़े, लेकिन सड़कें और सार्वजनिक परिवहन उसी रफ्तार से विकसित नहीं हो पाए। फ्लाईओवर केवल कुछ चौराहों पर राहत देते हैं, लेकिन वे गाड़ियों की संख्या कम नहीं करते। उल्टा, बेहतर सड़क देखकर लोग निजी वाहन ज्यादा इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे जाम फिर उसी जगह या अगले चौराहे पर खड़ा हो जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि फ्लाईओवर स्थायी समाधान नहीं हैं, बल्कि यह “शॉर्ट टर्म ट्रीटमेंट” है। असली जरूरत है मजबूत और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की। पुणे मेट्रो, बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (BRT), साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ—ये सभी उपाय मिलकर ही ट्रैफिक जाम कम कर सकते हैं।
चुनाव के समय नेता अक्सर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की बात करते हैं क्योंकि वे दिखने में आकर्षक होते हैं। लेकिन ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग पॉलिसी, ऑफिस टाइम का विकेंद्रीकरण और वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्पों पर कम ध्यान दिया जाता है। पुणे जैसे शहर में, जहां वाहन संख्या तेजी से बढ़ रही है, केवल फ्लाईओवर बनाकर समस्या का समाधान संभव नहीं है।
अगर आने वाले चुनावों में पुणे ट्रैफिक जाम को सच में कम करना है, तो नीतियों का फोकस फ्लाईओवर से हटकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सस्टेनेबल मोबिलिटी पर होना चाहिए। तभी जाम वाला पुणे एक सुगम और रहने लायक शहर बन पाएगा।