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वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड? ट्रंप के कथित ‘3-फेज़ प्लान’ की पूरी कहानी, क्यों बढ़ी आर्कटिक में हलचल

International  •  👁 16 views  •  05 Jan 2026
वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड? ट्रंप के कथित ‘3-फेज़ प्लान’ की पूरी कहानी, क्यों बढ़ी आर्कटिक में हलचल
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स और विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ा एक कथित ‘3-फेज़ प्लान’ सामने आया है, जिसमें आर्कटिक क्षेत्र के रणनीतिक द्वीप ग्रीनलैंड पर प्रभाव बढ़ाने की बात कही जा रही है। इससे पहले वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की सख़्त नीति और दख़ल के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे में सवाल उठ रहा है—क्या अगला निशाना ग्रीनलैंड है?
ग्रीनलैंड, जो तकनीकी रूप से डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, अपने विशाल प्राकृतिक संसाधनों, दुर्लभ खनिजों और रणनीतिक लोकेशन के कारण वैश्विक शक्तियों के लिए अहम बनता जा रहा है। आर्कटिक में बर्फ़ पिघलने से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जिससे अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों की दिलचस्पी बढ़ी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप से जुड़े कथित ‘3-फेज़ प्लान’ में पहला चरण आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाने का बताया जाता है। दूसरे चरण में निवेश, सैन्य मौजूदगी और इन्फ्रास्ट्रक्चर के ज़रिये प्रभाव बढ़ाने की बात कही जाती है। वहीं तीसरे चरण को लेकर अटकलें हैं कि इसमें राजनीतिक नियंत्रण या लंबे समय के समझौतों के ज़रिये पकड़ मज़बूत करने की रणनीति हो सकती है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड के स्थानीय नेताओं ने पहले भी स्पष्ट किया है कि द्वीप “बिकाऊ नहीं” है और उसकी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पूरा मामला सीधे कब्ज़े से ज़्यादा भू-राजनीतिक दबदबे और संसाधनों की होड़ से जुड़ा है।
फिलहाल, ग्रीनलैंड को लेकर उठी ये चर्चाएं वैश्विक राजनीति में आर्कटिक क्षेत्र की बढ़ती अहमियत को दर्शाती हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कथित योजना महज़ अटकल साबित होती है या अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव लाती है।