The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 हिलसा में महाशिवरात्रि को लेकर ब्रह्माकुमारी बहनों की भव्य चैतन्य शोभायात्रा, नगर हुआ भक्तिमय     🔴 खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर खेत में दफनाया शव, ऊपर बो दी गेहूं की फसल; दो महीने बाद खुला राज     🔴 पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहुँचे स्वामी विवेकानंद अवार्ड सेरेमनी में     🔴 बाँका में DM और SP ने किया EVM/VVPAT वेयर हाउस का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा     🔴 लखीसराय पुलिस ने जारी किया पोस्टर, 14 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी लापता     🔴 मद्य निषेध के तहत बड़ी कार्रवाई, 69 लीटर अवैध शराब बरामद     🔴 दरभंगा में 6 साल की मासूम से दरिंदगी, इलाके में आक्रोश—आरोपी को कड़ी सजा की मांग     🔴 एकरससराय स्थित प्रसिद्ध आंगारी धाम की धर्मशाला जर्जर, हादसे का खतरा बढ़ा     🔴 अहमदाबाद के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल में लगातार घटनाएँ, अभिभावकों में गहरी चिंता     🔴 खुदागंज थाना पहुंचा भटकता मिला 8 वर्षीय बालक, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस कर रही पहचान की कोशिश    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी: क्यों ‘स्ट्रीट फाइटर’ मुख्यमंत्री को राजनीतिक तौर पर काबू करना इतना मुश्किल है?

Politics  •  👁 9 views  •  05 Feb 2026
सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी: क्यों ‘स्ट्रीट फाइटर’ मुख्यमंत्री को राजनीतिक तौर पर काबू करना इतना मुश्किल है?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, इस बार सुप्रीम कोर्ट से जुड़े मामले को लेकर। सड़क से सत्ता तक का सफर तय करने वाली ममता बनर्जी भारतीय राजनीति की उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें “स्ट्रीट फाइटर” कहा जाता है। सवाल यह है कि आखिर क्यों उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक तौर पर काबू करना इतना मुश्किल माना जाता है?
ममता बनर्जी की राजनीति की जड़ें आंदोलन में हैं। कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाना हो या बंगाल में 34 साल के वाम शासन को हटाना—उन्होंने हर लड़ाई सड़क पर उतरकर लड़ी। यही कारण है कि जब मामला अदालत या संवैधानिक संस्थाओं तक पहुंचता है, तब भी उनकी राजनीति टकराव और प्रतिरोध की भाषा में दिखती है।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मौजूदा विवाद केवल कानूनी नहीं, बल्कि संघीय ढांचे और राज्य की स्वायत्तता से भी जुड़ा है। ममता बनर्जी अक्सर केंद्र सरकार पर राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप का आरोप लगाती रही हैं। उनका यह रुख उन्हें विपक्ष की राजनीति में एक मजबूत चेहरा बनाता है, खासकर तब जब गैर-बीजेपी राज्यों की बात आती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ममता की सबसे बड़ी ताकत उनका जमीनी जुड़ाव है। वे खुद को जनता के संघर्षों से जोड़कर पेश करती हैं, चाहे वह धरना हो, प्रदर्शन हो या प्रशासनिक फैसलों का विरोध। यही कारण है कि कानूनी या राजनीतिक दबाव भी उनके जनाधार को कमजोर नहीं कर पाता।
हालांकि आलोचक यह भी कहते हैं कि टकराव की राजनीति कई बार संस्थागत संतुलन को चुनौती देती है। लेकिन ममता बनर्जी की छवि एक ऐसी नेता की बन चुकी है, जो पीछे हटने के बजाय लड़ाई को और तेज करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट में खड़ा यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि ममता बनर्जी सिर्फ एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की सबसे जुझारू और अप्रत्याशित शख्सियतों में से एक हैं—जिन्हें समझना और काबू करना दोनों ही आसान नहीं है।