The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 हिलसा में महाशिवरात्रि को लेकर ब्रह्माकुमारी बहनों की भव्य चैतन्य शोभायात्रा, नगर हुआ भक्तिमय     🔴 खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर खेत में दफनाया शव, ऊपर बो दी गेहूं की फसल; दो महीने बाद खुला राज     🔴 पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहुँचे स्वामी विवेकानंद अवार्ड सेरेमनी में     🔴 बाँका में DM और SP ने किया EVM/VVPAT वेयर हाउस का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा     🔴 लखीसराय पुलिस ने जारी किया पोस्टर, 14 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी लापता     🔴 मद्य निषेध के तहत बड़ी कार्रवाई, 69 लीटर अवैध शराब बरामद     🔴 दरभंगा में 6 साल की मासूम से दरिंदगी, इलाके में आक्रोश—आरोपी को कड़ी सजा की मांग     🔴 एकरससराय स्थित प्रसिद्ध आंगारी धाम की धर्मशाला जर्जर, हादसे का खतरा बढ़ा     🔴 अहमदाबाद के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल में लगातार घटनाएँ, अभिभावकों में गहरी चिंता     🔴 खुदागंज थाना पहुंचा भटकता मिला 8 वर्षीय बालक, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस कर रही पहचान की कोशिश    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

‘सिर्फ 2-4-5 मौतें’: कफ सिरप से हुई मौतों पर राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री का बयान, ‘लापरवाह माता-पिता’ को ठहराया ज़िम्मेदार

Politics  •  👁 14 views  •  03 Feb 2026
‘सिर्फ 2-4-5 मौतें’: कफ सिरप से हुई मौतों पर राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री का बयान, ‘लापरवाह माता-पिता’ को ठहराया ज़िम्मेदार
राजस्थान में कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री का बयान विवादों में आ गया है। मंत्री ने मौतों की संख्या को कमतर आंकते हुए कहा कि यह “सिर्फ 2-4-5 मौतें” हैं और इसके लिए सरकार से ज़्यादा “लापरवाह माता-पिता” को ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार बच्चों की मौत जैसे गंभीर मामले को हल्के में ले रही है और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि किसी भी संख्या में बच्चों की मौत को “सिर्फ” कहकर टालना अमानवीय और असंवेदनशील है।
मामला कथित तौर पर दूषित या नकली कफ सिरप से जुड़ा है, जिसके सेवन के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ी और कुछ की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित दवा कंपनियों व सप्लाई चेन की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, अभी तक जांच की प्रगति और जिम्मेदारी तय करने को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि माता-पिता को बच्चों को दवा देने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं नहीं देनी चाहिए। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह तर्क सरकार और स्वास्थ्य तंत्र की जिम्मेदारी को कम नहीं करता। दवाओं की गुणवत्ता, निगरानी और बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में जवाबदेही तय करना और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है। बच्चों की मौत केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का संकेत होती है। यह मामला न केवल दवा नियमन, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और राजनीतिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।