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NCP मर्जर: ‘अंदरूनी मामला’ कैसे बन गया फडणवीस और शरद पवार की राजनीतिक लड़ाई

Politics  •  👁 6 views  •  03 Feb 2026
NCP मर्जर: ‘अंदरूनी मामला’ कैसे बन गया फडणवीस और शरद पवार की राजनीतिक लड़ाई
राष्ट्रीय राजनीति में हमेशा से ही राजनीतिक दलों के भीतर के फैसले केंद्र में रहते हैं, लेकिन महाराष्ट्र की सियासत में NCP (नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी) के मर्जर का मामला अब सीधे तौर पर बड़े नेताओं की राजनीतिक जंग में बदल गया है। मूल रूप से यह मर्जर का मामला पार्टी का “अंदरूनी मामला” माना जा रहा था, लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी सामने आई, यह फडणवीस और NCP प्रमुख शरद पवार के बीच एक खुली राजनीतिक लड़ाई का रूप ले गया।
NCP मर्जर के मुद्दे की शुरुआत तब हुई जब पार्टी के कुछ नेताओं ने महागठबंधन और बीजेपी/शिवसेना गठबंधन में अपने राजनीतिक भविष्य को देखते हुए मर्जर के विकल्प पर विचार शुरू किया। इस दौरान पार्टी नेतृत्व ने इसे आंतरिक मामलों के दायरे में रखा। लेकिन बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप देकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की। उन्होंने मीडिया और विधानसभा में इस पर सवाल उठाकर शरद पवार की रणनीति को चुनौती दी।
शरद पवार ने भी पलटवार किया और कहा कि NCP की रणनीति और फैसले पार्टी के भीतर पूरी तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप पार्टी के आंतरिक मामलों को प्रभावित नहीं कर सकता।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल पार्टी मर्जर का नहीं रह गया, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीतिक सत्ता में संतुलन और गठबंधन की दिशा तय करने वाला मुद्दा बन गया है। फडणवीस इसे BJP की ताकत दिखाने और विपक्षी दलों में असंतोष पैदा करने के अवसर के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि NCP मर्जर के इस “अंदरूनी मामले” के राजनीतिकरण से अगले चुनाव और गठबंधन की रणनीति पर भी गहरा असर पड़ेगा। यह लड़ाई दिखाती है कि भारतीय राजनीति में आंतरिक पार्टी फैसलों को भी आसानी से सार्वजनिक और सत्ता संघर्ष के मंच पर लाया जा सकता है।