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अजित पवार की कमी महसूस, सुनेत्रा पवार के सामने NCP-महायुति में बड़ी चुनौती—‘कार्य मुश्किल है’

Politics  •  👁 4 views  •  31 Jan 2026
अजित पवार की कमी महसूस, सुनेत्रा पवार के सामने NCP-महायुति में बड़ी चुनौती—‘कार्य मुश्किल है’
मुंबई/बारामती: महाराष्ट्र में दिवंगत नेता अजित पवार की जगह दिल्‍ली से राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीयवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-Ajit Pawar faction) का नेतृत्व और महायुति गठबंधन में अहम भूमिका संभालने के लिए नामित किया गया है। यह राजनीतिक बदलाव भले ही भावनात्मक रूप से पार्टी के लिए एकजुटता का संकेत है, लेकिन सुनेत्रा के सामने बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं।
सुनेत्रा पवार न केवल अपने पति के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में महत्त्वपूर्ण पदों—जैसे उपमुख्यमंत्री और NCP विधायक दल की नेता—पर क़दम रख रही हैं, बल्कि उन्हें भारी राजनीतिक अनुभवहीनता के बावजूद पार्टी के भीतर पुराने दिग्गजों के साथ तालमेल बैठाना है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जैसे प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबळ और सुनील तटकरे पहले से ही राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हैं, और सुनेत्रा को उनके साथ संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।
सबसे बड़ी चुनौती महायुति गठबंधन में उनके प्रभाव को स्थापित करना है। अजित पवार का बीजेपी और शिवसेना के नेताओं के साथ एक सीधा संवाद और मजबूत समझौता रहा है—जिससे NCP को महत्त्वपूर्ण मंत्रालयों और संसाधनों में हिस्सेदारी मिली। सुनेत्रा के पास इस तरह का कोई राजनीतिक रिकॉर्ड नहीं है, और पार्टी को डर है कि अगर वह गठबंधन के भीतर अपनी जगह मजबूती से नहीं बना पाती तो NCP की आवाज़ धीमी पड़ सकती है।
साथ ही, दोनों NCP गुटों के पुनर्मिलन की चर्चाएँ भी सुनेत्रा के आगे बड़ी राजनीतिक पहेली बनी हुई हैं। अगर शरद पवार का गुट एकीकृत पार्टी के रूप में वापस आता है, तो सुनेत्रा को तय करना होगा कि वे पार्टी के लिए अलग राह चुनें या एकता की दिशा में काम करें—जिससे दोनों पक्षों के नेताओं के समर्थन और भविष्य की रणनीति पर असर पड़ेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सुनेत्रा पवार के समक्ष सबसे अहम कार्य “विश्वास और नेतृत्व” का निर्माण करना है, न केवल NCP के भीतर बल्कि महायुति गठबंधन के नेताओं के बीच भी। इस राजनीति-भरी समय में उनके कार्य कौशल और रणनीति दोनों की कड़ी परीक्षा होने वाली है।