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क्या WhatsApp सच में प्राइवेट है? अमेरिकी मुकदमे में मेटा पर एन्क्रिप्टेड मैसेज तक पहुंच के आरोप

International  •  👁 7 views  •  31 Jan 2026
क्या WhatsApp सच में प्राइवेट है? अमेरिकी मुकदमे में मेटा पर एन्क्रिप्टेड मैसेज तक पहुंच के आरोप
दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स में से एक WhatsApp को लेकर एक बार फिर प्राइवेसी पर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिका में दायर एक मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि WhatsApp की पेरेंट कंपनी Meta के पास यूज़र्स के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेज तक पहुंच हो सकती है। इस दावे ने डिजिटल प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
मुकदमे में यह आरोप लगाया गया है कि Meta, WhatsApp की तकनीकी संरचना और बैक-एंड सिस्टम के ज़रिए यूज़र डेटा तक अप्रत्यक्ष रूप से पहुंच बना सकती है। हालांकि, WhatsApp लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि उसके प्लेटफॉर्म पर भेजे गए संदेश एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित होते हैं, यानी संदेश सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकता है।
कानूनी दस्तावेज़ों के अनुसार, विवाद का केंद्र यह सवाल है कि क्या मेटाडेटा, बैकअप सिस्टम या अन्य तकनीकी माध्यमों से यूज़र की बातचीत तक पहुंच संभव है। याचिका में कहा गया है कि आम यूज़र्स को यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया जाता कि उनका डेटा किस हद तक सुरक्षित है।
Meta ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि WhatsApp की एन्क्रिप्शन नीति मजबूत है और कंपनी यूज़र्स के निजी संदेश नहीं पढ़ती। कंपनी के अनुसार, किसी भी कानूनी अनुरोध पर भी कंटेंट साझा करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है।
डिजिटल अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल WhatsApp तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। यूज़र्स के लिए यह समझना जरूरी है कि एन्क्रिप्शन के बावजूद क्लाउड बैकअप, मेटाडेटा और थर्ड-पार्टी इंटीग्रेशन किस तरह जोखिम पैदा कर सकते हैं।
यह मुकदमा ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया भर में डेटा प्राइवेसी कानूनों को और सख्त बनाने की मांग तेज़ हो रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अमेरिकी अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और इसका असर WhatsApp की प्राइवेसी छवि पर कितना पड़ता है