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इकोनॉमिक सर्वे की RTI रिव्यू मांग पर कांग्रेस की आलोचना, लेकिन UPA दौर में मंत्री भी जता चुके हैं ऐसी ही चिंताएं

Politics  •  👁 10 views  •  30 Jan 2026
इकोनॉमिक सर्वे की RTI रिव्यू मांग पर कांग्रेस की आलोचना, लेकिन UPA दौर में मंत्री भी जता चुके हैं ऐसी ही चिंताएं
इकोनॉमिक सर्वे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने इकोनॉमिक सर्वे की RTI (सूचना का अधिकार) के तहत समीक्षा की मांग को लेकर आलोचना की है। कांग्रेस का कहना है कि इकोनॉमिक सर्वे एक नीतिगत और विशेषज्ञ-आधारित दस्तावेज़ है, जिसे RTI के दायरे में लाकर उसकी स्वायत्तता को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल भी उठ रहे हैं, क्योंकि UPA सरकार के दौरान कई वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं ने भी इकोनॉमिक सर्वे और आर्थिक आंकड़ों की पारदर्शिता को लेकर चिंताएं जताई थीं। उस समय भी यह बहस हुई थी कि क्या नीति निर्माण से जुड़े दस्तावेज़ों पर अधिक सार्वजनिक निगरानी होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारदर्शिता बनाम संस्थागत स्वतंत्रता की बड़ी बहस से जुड़ा हुआ है। एक ओर RTI को लोकतंत्र में जवाबदेही का अहम औज़ार माना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह तर्क भी दिया जाता है कि आर्थिक नीतियों से जुड़े दस्तावेज़ों पर अत्यधिक हस्तक्षेप विशेषज्ञों की स्वतंत्र राय को प्रभावित कर सकता है।
आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस का वर्तमान रुख राजनीतिक सुविधा के अनुसार बदला हुआ दिखाई देता है। वहीं पार्टी समर्थकों का तर्क है कि अलग-अलग समय और परिस्थितियों में नीति और शासन की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं।
यह विवाद दिखाता है कि भारत में आर्थिक नीति, पारदर्शिता और राजनीतिक बयानबाज़ी एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी हुई हैं। इकोनॉमिक सर्वे पर RTI की मांग को लेकर यह बहस आने वाले समय में सरकार और विपक्ष के बीच और तेज़ हो सकती है।