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RTI एक्ट पर फिर मंथन की जरूरत: इकोनॉमिक सर्वे ने कहा—‘यह कानून बेकार की जिज्ञासा के लिए नहीं बना’

Politics  •  👁 7 views  •  30 Jan 2026
RTI एक्ट पर फिर मंथन की जरूरत: इकोनॉमिक सर्वे ने कहा—‘यह कानून बेकार की जिज्ञासा के लिए नहीं बना’
केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की गई है। सर्वे में कहा गया है कि RTI एक्ट कभी भी बेकार की जिज्ञासा या सरकारी कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप के लिए एक टूल के रूप में नहीं बनाया गया था, बल्कि इसका उद्देश्य शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
इकोनॉमिक सर्वे में सुझाव दिया गया है कि लगभग दो दशक पुराने इस कानून की वर्तमान परिस्थितियों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, कई बार RTI का इस्तेमाल ऐसे सवालों के लिए किया जा रहा है जिनका सीधा संबंध जनहित से नहीं होता, जिससे सरकारी मशीनरी पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और निर्णय-प्रक्रिया प्रभावित होती है।
सर्वे में यह भी कहा गया है कि नीतिगत मसौदे, आंतरिक चर्चाएं और प्रारंभिक नोट्स को बिना संदर्भ के सार्वजनिक किए जाने से अधिकारियों के बीच स्वतंत्र विचार-विमर्श बाधित हो सकता है। इसलिए इन दस्तावेजों को अंतिम निर्णय से पहले RTI के दायरे से बाहर रखने पर विचार किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, कुछ सेवा संबंधी रिकॉर्ड, गोपनीय रिपोर्ट और प्रशासनिक सूचनाओं को भी सीमित परिस्थितियों में सार्वजनिक न करने की सिफारिश की गई है, बशर्ते कि इससे लोकहित प्रभावित न हो। इकोनॉमिक सर्वे ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी बदलाव का उद्देश्य RTI कानून को कमजोर करना नहीं, बल्कि इसे और अधिक प्रभावी, संतुलित और व्यावहारिक बनाना होना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि RTI एक्ट की समीक्षा पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता के बीच संतुलन बनाकर की जाती है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत कर सकती है। हालांकि, इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना भी जताई जा रही है।