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राही अनिल बर्वे बोले: ‘मायासभा को कम से कम 50 बार बंद कर देना चाहिए था’, ओरिजिनल कहानियों को बताया बेहद रिस्की

Entertainment  •  👁 13 views  •  29 Jan 2026
राही अनिल बर्वे बोले: ‘मायासभा को कम से कम 50 बार बंद कर देना चाहिए था’, ओरिजिनल कहानियों को बताया बेहद रिस्की
फिल्ममेकर राही अनिल बर्वे, जो अपनी अनोखी सोच और प्रयोगधर्मी सिनेमा के लिए जाने जाते हैं, ने हाल ही में ओरिजिनल कंटेंट को लेकर एक दिलचस्प और ईमानदार बयान दिया है। अपनी अपकमिंग या चर्चित परियोजना ‘मायासभा’ के संदर्भ में बात करते हुए बर्वे ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को “कम से कम 50 बार बंद कर देना चाहिए था”, क्योंकि ओरिजिनल कहानियाँ बनाना बेहद जोखिम भरा काम होता है।
एक इंटरव्यू में राही अनिल बर्वे ने बताया कि जब आप किसी मौलिक कहानी पर काम करते हैं, तो आपके पास कोई तय फॉर्मूला या पहले से मौजूद दर्शक अपेक्षाएँ नहीं होतीं। उन्होंने कहा, “ओरिजिनल स्टोरीटेलिंग में हर कदम पर अनिश्चितता होती है—यह समझ नहीं आता कि दर्शक इसे स्वीकार करेंगे या नहीं।”
बर्वे, जो इससे पहले ‘तुम्बाड’ जैसी कल्ट फिल्म बना चुके हैं, मानते हैं कि आज के दौर में जहां रीमेक, फ्रैंचाइज़ी और सुरक्षित कंटेंट को प्राथमिकता दी जाती है, वहां नई और अनोखी कहानियों को फाइनेंस कराना और पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। ‘मायासभा’ के विकास के दौरान उन्हें कई बार लगा कि प्रोजेक्ट को रोक देना ही बेहतर होगा।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसी जोखिम में रचनात्मक संतुष्टि छिपी होती है। उनके मुताबिक, ओरिजिनल कहानियाँ भले ही डर पैदा करें, लेकिन वही सिनेमा और ओटीटी को आगे बढ़ाती हैं। “अगर हर कोई सुरक्षित रास्ता चुनेगा, तो नया क्या बचेगा?”—बर्वे ने सवाल उठाया।
इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि राही अनिल बर्वे का यह बयान मौजूदा एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सच्चाई को उजागर करता है, जहां रचनात्मकता और बिज़नेस के बीच संतुलन बनाना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।