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हिमंता बिस्वा सरमा का विवादित बयान: “अगर हम जीवित रहना चाहते हैं तो ध्रुवीकरण की राजनीति करनी होगी”

Politics  •  👁 5 views  •  29 Jan 2026
हिमंता बिस्वा सरमा का विवादित बयान: “अगर हम जीवित रहना चाहते हैं तो ध्रुवीकरण की राजनीति करनी होगी”
असम। राज्य के कैबिनेट मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में एक विवादित बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं को मियाँ समुदाय के खिलाफ शिकायतें दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं और अगर वे राजनीतिक रूप से जीवित रहना चाहते हैं, तो उन्हें ध्रुवीकरण की राजनीति अपनानी होगी।
इस बयान के बाद विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आलोचना शुरू कर दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियाँ समाज में धार्मिक और सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया है और इसका उद्देश्य राजनीतिक आधार मजबूत करना हो सकता है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह एक रणनीतिक दृष्टिकोण है, जिससे पार्टी अपने राजनीतिक हितों की रक्षा कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक प्रणाली में चुनावी जीत और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कभी-कभी कठोर कदम उठाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां सामाजिक सामंजस्य और भाईचारे के लिए खतरा बन सकती हैं। राजनीतिक ध्रुवीकरण से मतदाताओं के बीच विभाजन और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा, यह बयान मीडिया और सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है और नागरिक समाज में व्यापक बहस का विषय बन गया है।
कुल मिलाकर, हिमंता बिस्वा सरमा का यह बयान चुनावी राजनीति, सामुदायिक संवेदनशीलता और सामाजिक ध्रुवीकरण के मुद्दों को लेकर गर्म बहस छेड़ रहा है। अब यह देखना होगा कि इस बयान का राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर क्या असर पड़ता है और राज्य की राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।