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बंगाल के गृह सचिव को ऑब्ज़र्वर बनाना क्यों बना विवाद की जड़? ECI के दुर्लभ फैसले से टकराव के आसार

Politics  •  👁 5 views  •  29 Jan 2026
बंगाल के गृह सचिव को ऑब्ज़र्वर बनाना क्यों बना विवाद की जड़? ECI के दुर्लभ फैसले से टकराव के आसार
भारत के चुनावी इतिहास में एक असामान्य कदम उठाते हुए चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव को चुनावी ऑब्ज़र्वर नियुक्त किया है। आम तौर पर ऑब्ज़र्वर के तौर पर केंद्र या अन्य राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया जाता है, ताकि निष्पक्षता और तटस्थता बनी रहे। ऐसे में राज्य के ही शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी को यह जिम्मेदारी देना कई सवाल खड़े कर रहा है और इसे एक संभावित टकराव की वजह माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गृह सचिव राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से सीधे तौर पर जुड़े होते हैं। चुनाव के दौरान वही विभाग सबसे संवेदनशील भूमिका निभाता है। ऐसे में उसी अधिकारी को ऑब्ज़र्वर बनाना हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) की आशंका पैदा करता है। विपक्षी दलों का तर्क है कि इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं और प्रशासन पर राजनीतिक दबाव के आरोप और तेज़ हो सकते हैं।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावों को लेकर माहौल पहले से ही तनावपूर्ण रहता है। राज्य में हिंसा, आचार संहिता के उल्लंघन और प्रशासन की भूमिका को लेकर अतीत में कई बार विवाद हो चुके हैं। ऐसे में ECI का यह कदम केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक और टकराव की जमीन तैयार कर सकता है।
हालांकि, चुनाव आयोग का पक्ष यह हो सकता है कि गृह सचिव को जमीनी हालात की बेहतर समझ है और वे प्रशासनिक समन्वय को प्रभावी बना सकते हैं। आयोग अक्सर यह तर्क देता रहा है कि उसका उद्देश्य निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना है, चाहे उसके लिए पारंपरिक तरीकों से हटकर फैसले ही क्यों न लेने पड़ें।
फिर भी, यह निर्णय एक मिसाल बन सकता है। अगर भविष्य में ऐसे कदमों को सामान्य बनाया गया, तो ऑब्ज़र्वर प्रणाली की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता पर बहस और तेज़ होगी। कुल मिलाकर, ECI का यह दुर्लभ कदम चुनावी प्रबंधन से ज्यादा राजनीतिक और संवैधानिक बहस को जन्म देता दिख रहा है।