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दिल्ली कॉन्फिडेंशियल: ‘फ्रेंडली फ्राइट’ ने बढ़ाई सियासी हलचल, अंदरखाने मची खामोश बेचैनी

Politics  •  👁 7 views  •  29 Jan 2026
दिल्ली कॉन्फिडेंशियल: ‘फ्रेंडली फ्राइट’ ने बढ़ाई सियासी हलचल, अंदरखाने मची खामोश बेचैनी
दिल्ली के सत्ता गलियारों में इन दिनों सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन अंदरखाने माहौल कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। दिल्ली कॉन्फिडेंशियल के मुताबिक, हालिया घटनाक्रम ने कई “दोस्ताना” माने जाने वाले राजनीतिक चेहरों के बीच एक तरह की फ्रेंडली फ्राइट यानी दोस्ताना डर की स्थिति पैदा कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, हाल के फैसलों और रणनीतिक बैठकों के बाद कुछ नेताओं को यह एहसास होने लगा है कि सत्ता में नजदीकी होने के बावजूद समीकरण कभी भी बदल सकते हैं। यही वजह है कि सार्वजनिक मंचों पर मुस्कान और एकता दिखाने वाले नेता, बंद कमरों में सतर्कता और गणनाओं में जुटे हुए हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फ्रेंडली फ्राइट किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है। केंद्र की राजनीति हो या संगठन के भीतर की हलचल, हर जगह संभावित फेरबदल और जिम्मेदारियों के बदलाव को लेकर बेचैनी देखी जा रही है। खासतौर पर आने वाले सत्र और भविष्य की रणनीति को लेकर नेता कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं।
दिल्ली के पावर सर्कल में यह भी चर्चा है कि कुछ अहम फाइलों और फैसलों ने पुराने भरोसेमंद रिश्तों में भी अनकहा तनाव पैदा कर दिया है। हालांकि, कोई भी नेता खुलकर असहमति जाहिर नहीं कर रहा, क्योंकि सब जानते हैं कि राजनीति में दोस्ती और दूरी दोनों अस्थायी होती हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फ्रेंडली फ्राइट दरअसल राजनीतिक परिपक्वता का संकेत भी है, जहां हर कदम सोच-समझकर रखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह डर सिर्फ सतर्कता तक सीमित रहता है या फिर बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका बनता है।
फिलहाल, दिल्ली की सियासत में शांति के पीछे छिपी यह हलचल आने वाले समय में कई चौंकाने वाले मोड़ ला सकती है