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मायावती ने UGC के इक्विटी नियमों के विरोध पर उठाए 'जातिवादी मानसिकता' के सवाल

Politics  •  👁 11 views  •  28 Jan 2026
मायावती ने UGC के इक्विटी नियमों के विरोध पर उठाए 'जातिवादी मानसिकता' के सवाल
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष मायावती ने हाल ही में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए इक्विटी और समावेशन नियमों के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस विरोध के पीछे जातिवादी मानसिकता को जिम्मेदार ठहराया।
मायावती ने अपने बयान में कहा कि UGC के नियम उच्च शिक्षा में समान अवसर और समावेशिता बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं। उनका कहना था कि विरोध करने वाले लोग इन नियमों को केवल राजनीतिक या व्यक्तिगत हितों के नजरिए से देख रहे हैं और इस वजह से समाज में पिछड़े वर्गों के अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा में समानता और अवसर की नीति केवल कानूनी या प्रशासनिक पहल नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और समाज में समावेशिता सुनिश्चित करने का भी एक तरीका है। मायावती ने यह भी चेतावनी दी कि जातिवादी मानसिकता और पूर्वाग्रहों के कारण अगर विरोध जारी रहा, तो यह समाज के कमजोर वर्गों के हक़ पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारतीय राजनीति में शिक्षा और जातिगत समानता के मुद्दों पर बहस को और उभार सकता है। राजनीतिक दलों के बीच इस तरह के मुद्दों पर अक्सर मतभेद देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार मायावती ने इसे सीधे सामाजिक और जातिगत दृष्टिकोण से जोड़कर अपनी बात कही।
शिक्षाविद और समाजशास्त्री बताते हैं कि UGC के नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा में विविधता और समावेशिता को बढ़ावा देना है। ऐसे में विरोध प्रदर्शन पर यह टिप्पणी शिक्षा और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन पर नई बहस खोल सकती है।
इस प्रकार, मायावती का बयान शिक्षा नीति और सामाजिक समानता पर जारी बहस में नए दृष्टिकोण को सामने लाता है।