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‘अगर ज़िंदगी बचानी है तो ध्रुवीकरण की राजनीति करनी होगी’: हिमंता बिस्वा सरमा का विवादित बयान

Politics  •  👁 6 views  •  28 Jan 2026
‘अगर ज़िंदगी बचानी है तो ध्रुवीकरण की राजनीति करनी होगी’: हिमंता बिस्वा सरमा का विवादित बयान
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का हालिया बयान राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं को “मियास (मुस्लिम समुदाय)” के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है, और साथ ही यह भी कहा कि अगर वे सत्ता में टिकना चाहते हैं, तो ध्रुवीकरण (पोलराइजेशन) की राजनीति करनी होगी।
सरमा का यह बयान उस समय आया जब राज्य में आगामी चुनावों और सामाजिक-सांप्रदायिक तनाव को लेकर राजनीतिक समीकरण चर्चा में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रणनीति केवल वोट बैंक बनाने के लिए नहीं, बल्कि राजनीति में प्रभाव बनाए रखने और नेतृत्व मजबूत करने के लिए अपनाई जा रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बयान न केवल राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बना सकते हैं, बल्कि समुदायों के बीच विभाजन को भी बढ़ावा देते हैं। विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक और खतरनाक बताया है। कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस बयान को लेकर बहस शुरू हो गई है, जिसमें लोग इसे लोकतंत्र और सामाजिक समरसता के लिए चिंताजनक मान रहे हैं।
सरमा ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में अपनी पहचान और सत्ता बनाए रखने के लिए कभी-कभी कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। उनका यह बयान राजनीतिक दृष्टिकोण से रणनीतिक माना जा रहा है, लेकिन सामाजिक दृष्टि से इसे विवादास्पद और संवेदनशील बताया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत में ध्रुवीकरण की राजनीति पहले भी कई बार देखी गई है, लेकिन सार्वजनिक तौर पर किसी नेता द्वारा इसे स्वीकार करना दुर्लभ है। हिमंता बिस्वा सरमा का यह बयान असम की राजनीति में आगामी समय के लिए नए बहस के बिंदु और संभावित मतदाताओं की प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करेगा।
कुल मिलाकर, यह बयान केवल राजनीतिक रणनीति की चर्चा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्य के सवाल भी खड़े करता है।