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मतदाता सूची पर विवाद के बाद सम्मान की सूची में नाम: ढोलक वादक मीर हाजी कासम को पद्म श्री

Politics  •  👁 8 views  •  28 Jan 2026
मतदाता सूची पर विवाद के बाद सम्मान की सूची में नाम: ढोलक वादक मीर हाजी कासम को पद्म श्री
गुजरात की राजनीति और समाज में हाल ही में एक दिलचस्प और प्रतीकात्मक घटनाक्रम देखने को मिला है। कुछ ही दिन पहले जब एक बीजेपी नेता ने गुजरात की मतदाता सूची में ढोलक वादक मीर हाजी कासम के नाम पर आपत्ति जताई थी, तब यह मामला पहचान और नागरिकता जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ गया था। अब उसी मीर हाजी कासम का नाम देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक—पद्म श्री—की सूची में शामिल किया गया है।
लोक कलाकार मीर हाजी कासम गुजरात की पारंपरिक लोक-संगीत परंपरा का एक जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने दशकों तक ढोलक वादन के माध्यम से लोक संस्कृति को जीवित रखा और उसे नई पीढ़ियों तक पहुँचाया। उनके संगीत ने धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में लोगों को जोड़ा है, और यही योगदान उन्हें पद्म श्री सम्मान तक ले गया।
मतदाता सूची को लेकर उठा विवाद उस समय सुर्खियों में आया, जब एक राजनीतिक नेता ने उनके नाम और पहचान पर सवाल खड़े किए। इस पर सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे एक कलाकार की गरिमा पर आघात बताया। कई लोगों ने यह भी कहा कि कला और संस्कृति की सेवा करने वालों की पहचान राजनीति से ऊपर होनी चाहिए।
अब पद्म श्री सूची में नाम आने के बाद यह घटनाक्रम एक मजबूत संदेश देता है—कि देश अपनी लोक परंपराओं और उन्हें सहेजने वाले कलाकारों को पहचानता और सम्मान देता है, चाहे उनके नाम, पृष्ठभूमि या पहचान को लेकर कितनी ही बहस क्यों न हो।
मीर हाजी कासम का यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन अनगिनत लोक कलाकारों की जीत है जो गुमनामी में रहकर भारतीय संस्कृति को समृद्ध करते रहे हैं। यह मामला यह भी दर्शाता है कि लोकतंत्र में विवाद और सम्मान—दोनों साथ-साथ चलते हैं, लेकिन अंततः सांस्कृतिक योगदान ही स्थायी पहचान बनता है।