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सेक्युलर TMC बनाम सांप्रदायिक BJP: राजनीतिक दुविधा में बंगाली वोटर, क्या अब बदलाव का समय आ गया है?

Politics  •  👁 7 views  •  28 Jan 2026
सेक्युलर TMC बनाम सांप्रदायिक BJP: राजनीतिक दुविधा में बंगाली वोटर, क्या अब बदलाव का समय आ गया है?
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। एक ओर खुद को सेक्युलर और अल्पसंख्यक समर्थक बताने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) है, तो दूसरी ओर राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की राजनीति को आगे बढ़ाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP)। इन दोनों ध्रुवों के बीच बंगाली वोटर आज एक गहरी राजनीतिक दुविधा में फंसा हुआ नजर आ रहा है।
पिछले एक दशक में TMC ने बंगाल की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाई है। ममता बनर्जी ने खुद को भाजपा के खिलाफ सबसे मुखर विपक्षी नेता के रूप में स्थापित किया है। अल्पसंख्यकों, महिलाओं और गरीब तबकों के लिए चलाई गई योजनाओं ने TMC को एक मजबूत सामाजिक आधार दिया। हालांकि, भ्रष्टाचार के आरोप, कानून-व्यवस्था पर सवाल और पार्टी के भीतर सत्ता के केंद्रीकरण ने कई मतदाताओं को असहज भी किया है।
दूसरी ओर BJP ने बंगाल में धार्मिक ध्रुवीकरण और राष्ट्रीय मुद्दों के जरिए अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश की है। पार्टी का दावा है कि वह “तुष्टिकरण की राजनीति” खत्म कर विकास और मजबूत शासन देगी। लेकिन BJP की सांप्रदायिक छवि, बाहरी नेतृत्व और बंगाली अस्मिता को लेकर उठते सवालों ने राज्य के एक बड़े वर्ग को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
आज बंगाली मतदाता के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि TMC या BJP में से कौन बेहतर है, बल्कि यह भी है कि बंगाल के भविष्य की दिशा क्या होनी चाहिए। क्या केवल भाजपा का विरोध ही राजनीति का आधार बना रह सकता है, या TMC को भी आत्ममंथन कर नए विकल्प और पारदर्शी शासन देना होगा?
राज्य का मतदाता अब भावनाओं से आगे बढ़कर सुशासन, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों पर जवाब चाहता है। यही कारण है कि यह कहा जा रहा है कि बंगाल की राजनीति में अब केवल “सेक्युलर बनाम सांप्रदायिक” की बहस से आगे बढ़ने का समय आ गया है।