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‘पद्मश्री विवाद: केरल कांग्रेस बनाम ZOHO’s वेम्बू — IIT मद्रास निदेशक वी कामकोटी को लेकर तीखी नोक‑झोंक

Politics  •  👁 7 views  •  27 Jan 2026
‘पद्मश्री विवाद: केरल कांग्रेस बनाम ZOHO’s वेम्बू — IIT मद्रास निदेशक वी कामकोटी को लेकर तीखी नोक‑झोंक
हाल ही में IIT मद्रास के निदेशक वी कामकोटी को पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने के बाद एक राजनीतिक विवाद सामने आया है, जिसमें केरल कांग्रेस और Zoho के सह‑संस्थापक श्रीधर वेम्बू के बीच सोशल मीडिया पर तीखी नोक‑झोंक हुई है। मामला आयोगित रूप से तब शुरू हुआ जब कांग्रेस ने कामकोटी के पिछले बयान का तंज कसते हुए उनका पुरस्कार गोमूत्र (cow urine) से जुड़ी शोध टिप्पणियों से जोड़ दिया। कामकोटी ने पिछले साल कहा था कि गोमूत्र में कुछ संभावित एंटी‑बैक्टीरियल और एंटी‑फंगल गुण पाए गए हैं — जिससे विवाद पैदा हुआ था।
कांग्रेस के केरल इकाई ने पद्मश्री मिलने की खुशी जताते हुए पोस्ट में व्यंग्य किया कि “देश IIT मद्रास में गोमूत्र पर आपकी शोध को पहचान रहा है, जिससे गोमूत्र को विश्व मंच पर ले जाया जा रहा है।” इस तंज ने विज्ञान, राजनीति और सार्वजनिक बहस के बीच एक गरम विवाद को जन्म दिया।
इसके उत्तर में Zoho के सह‑संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने कामकोटी का समर्थन करते हुए कांग्रेस की टिप्पणी को “उपनिवेशी मानसिकता” कहा और गोमूत्र तथा गोबर के माइक्रोबायोम में चिकित्सा‑वैज्ञानिक संभावनाएँ हो सकने की बात कही। वेम्बू ने यह भी जोर दिया कि कामकोटी IIT‑Madras के डीप‑टेक क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं और उन्होंने पुरस्कार पाने के लिए उत्तरदायी प्रोफाइल के अनुसार योगदान किया है।
वेम्बू ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन लोगों की सोच, जो पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को “अवैज्ञानिक” मानते हैं, एक आलोचनात्मक और उपनिवेशी दृष्टिकोण की झलक देती है। उन्होंने यह तर्क दिया कि गोमूत्र में पाए जाने वाले जैविक तत्वों पर शोध का वैज्ञानिक मूल्य हो सकता है और भविष्य में शोध समुदाय में यह अधिक मान्यता पा सकता है।
यह विवाद केवल पुरस्कार के संदर्भ में नहीं, बल्कि इस बात पर भी केंद्रित है कि पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान और राजनीति के बीच बातचीत कैसे होती है। कई लोगों ने टिप्पणी की है कि कामकोटी को उनके अकादमिक योगदान और तकनीकी नेतृत्व के लिए सम्मान मिला है, जबकि कुछ आलोचक उस पर अपनी व्यक्तिगत राय और शोध दावों को वैज्ञानिक रूप में प्रस्तुत करने पर आपत्ति जताते हैं।
इस प्रकार का विवाद दर्शाता है कि सार्वजनिक पुरस्कारों के निर्णय न केवल सम्मान‑संबंधी हैं, बल्कि वे सामाजिक बहस और विभिन्न दृष्टिकोणों को भी जन्म दे सकते हैं— खासकर जब यह वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक भावनाओं के तनाव से जुड़ा हो।