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भारत‑रूस 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास से बढ़ रहे हैं: राजदूत

International  •  👁 7 views  •  27 Jan 2026
भारत‑रूस 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास से बढ़ रहे हैं: राजदूत
भारत और रूस अपने द्विपक्षीय 100 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने के लिए आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसा भारत के रूस में राजदूत विनय कुमार ने कहा है। इस लक्ष्य को 2030 तक प्राप्त करने की दिशा में दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, और यह साझेदारी आज एक गतिशील आर्थिक दिशा में प्रवेश कर चुकी है।
राजदूत विनय कुमार ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बताया कि पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियाँ विशेष रूप से सक्रिय रहीं। उन्होंने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की भारत यात्रा सफल रही और इससे द्विपक्षीय साझेदारी को नई दिशा मिली। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार का लक्ष्य पूरी तरह से संभव और प्राप्त करने योग्य है।
उन्होंने आगे बताया कि व्यापार को बढ़ाने के लिए व्यापार के बasket यानी कारोबार की विविधता को बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत उर्वरक (fertilizers), कृषि (agriculture), इंजीनियरिंग तथा अन्य वस्तुओं और सेवाओं के क्षेत्रों में नए अवसरों की पहचान की जा रही है। इसके अलावा, एक मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement — FTA) इस लक्ष्य को पाने में सहायक भूमिका निभा सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024‑25 में भारत‑रूस द्विपक्षीय व्यापार लगभग 68.7 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, जिसमें रूस से बड़ा पैमाने पर कच्चे तेल का आयात शामिल है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार के लेन‑देन में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग भी बढ़ रहा है, जिससे आर्थिक साझेदारी और गहरी होती दिख रही है।
इस प्रयास में उद्योगों की भागीदारी भी अहम है, क्योंकि भारत और रूस कृषि, इंजीनियरिंग तथा उर्वरकों के अलावा अन्य क्षेत्रों में व्यापार को बढ़ावा देना चाहते हैं, ताकि व्यापार संतुलन और संतुलित रूप से आगे बढ़ सके।
विश्लेषकों के अनुसार, यह लक्ष्य न केवल दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि भुगतान प्रणालियों, मुद्रा विनिमय व्यवस्था और लॉजिस्टिक नेटवर्क का आधुनिकरण भी आवश्यक होगा, ताकि यह $100 बिलियन लक्ष्य वास्तविकता में बदल सके।
इस साझेदारी से भारत‑रूस के बीच दुनिया भर में रणनीतिक आर्थिक रिश्तों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, और दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग का विस्तार आने वाले वर्षों में और अधिक गति पकड़ सकता है।